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मराठा सेवा संघ द्वारा आयोजित ‘जीजाऊ रथयात्रा’ का बल्लारपुर नगर में स्वागत, जमाअत-ए-इस्लामी हिन्द की ओर से अभिनंदन

बल्लारपुर नगर में आज का दिन सामाजिक समरसता, विचार जागरण और भारतीय संस्कृति के अद्वितीय संगम का साक्षी बना। मराठा सेवा संघ द्वारा आयोजित जिजाऊ रथयात्रा का नगर में प्रवेश हुआ, और इस ऐतिहासिक रथयात्रा का स्वागत बल्लारपुर में जमाअत-ए-इस्लामी हिन्द नामक सामाजिक संगठन द्वारा अत्यंत सम्मान और उत्साह के साथ किया गया। यह आयोजन न केवल एक सांस्कृतिक यात्रा है, बल्कि भारत के महान सुधारकों और विचारकों के विचारों को जनसामान्य तक पहुँचाने का एक जीवंत प्रयास है।

जिजाऊ रथयात्रा का प्रारंभ 18 मार्च 2025 को पुणे के ऐतिहासिक लाल महाल से हुआ था। यह रथयात्रा महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों, नगरों और ग्रामों में भ्रमण करती हुई एक मई 2025 तक अपने समापन स्थल पर पहुँचेगी। इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य भारत की जननी और महान प्रेरणास्रोत राजमाता जिजाऊ, समाजसुधारक महात्मा ज्योतिराव फुले, सामाजिक न्याय के पुरोधा छत्रपति शाहू महाराज और भारतीय संविधान के निर्माता डॉ. बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर के विचारों को जन-जन तक पहुँचाना है। यह विचार यात्रा समाज में जागरूकता उत्पन्न करने, समता, स्वतंत्रता, बंधुत्व और शिक्षा के महत्व को पुनः स्थापित करने का एक प्रयास है।

आज दिनांक 11 अप्रैल 2025 को प्रातः 10 बजे, रथयात्रा बल्लारपुर नगर के नगर परिषद चौक पहुँची। यहाँ नगरवासियों ने भव्य स्वागत किया। विशेष रूप से जमाअत-ए-इस्लामी हिन्द के कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों ने इस यात्रा का स्वागत करते हुए एकता, बंधुत्व और सामाजिक समरसता का परिचय दिया। इस संगठन ने अपनी सक्रिय भूमिका के माध्यम से यह संदेश दिया कि भारत के ऐतिहासिक और सामाजिक आंदोलन केवल किसी एक जाति, वर्ग या समुदाय तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे सम्पूर्ण देश की सांझी धरोहर होते हैं।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि जिजाऊ, फुले, शाहू और आंबेडकर के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उस समय थे, जब उन्होंने सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध अपने संघर्ष का प्रारंभ किया था। उन्होंने समाज में व्याप्त असमानता, छुआछूत, जातिवाद और अज्ञानता के विरुद्ध साहसिक कदम उठाए। उन्होंने शिक्षा को सबसे बड़ा शस्त्र बताया और समाज के पिछड़े वर्गों को मुख्यधारा में लाने के लिए अपने जीवन को समर्पित कर दिया।

मराठा सेवा संघ के कार्यकर्ताओं ने रथयात्रा के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह यात्रा केवल एक प्रतीकात्मक आयोजन नहीं है, बल्कि यह एक विचार यात्रा है जो समाज में मूलभूत परिवर्तन की नींव रखती है। जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति तक समानता, शिक्षा और न्याय नहीं पहुँचता, तब तक किसी भी राष्ट्र की प्रगति अधूरी मानी जाती है। इसीलिए यह यात्रा हर नगर, हर गाँव, हर गली तक पहुँचने का प्रयास कर रही है ताकि लोगों में चेतना का संचार हो और वे अपने अधिकारों, कर्तव्यों और समाज के प्रति उत्तरदायित्व को समझ सकें।

इस अवसर पर नगर के नागरिकों की सहभागिता विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। कार्यक्रम स्थल पर युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। कई लोगों ने हाथों में संदेश पट्टिकाएँ लिए हुए रथयात्रा का स्वागत किया, जिन पर सामाजिक एकता, समता और शिक्षा के महत्व से जुड़े प्रेरणादायक संदेश लिखे हुए थे। बच्चों ने देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति दी और स्थानीय कलाकारों ने सामाजिक नाटकों के माध्यम से जिजाऊ माता और फुले, शाहू, आंबेडकर के विचारों को चित्रित किया।

जमाअत-ए-इस्लामी हिन्द के स्थानीय पदाधिकारियों ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में एकजुटता और भाईचारे की भावना का विस्तार होता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह हमारे देश की खूबसूरती है कि विभिन्न विचारधाराएँ, धर्म और पंथ होते हुए भी हम एक साथ सामाजिक सुधारों के लिए आगे बढ़ सकते हैं। रथयात्रा में भाग लेकर उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि भारत की आत्मा उसकी विविधता में निहित एकता में बसती है।

कार्यक्रम के अंत में मराठा सेवा संघ की ओर से सभी नगरवासियों से यह अपील की गई कि वे इस रथयात्रा में सक्रिय रूप से भाग लें, इसके उद्देश्यों को आत्मसात करें और समाज में जागरूकता फैलाने में अपनी भूमिका निभाएँ। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में जब समाज को भ्रम, जातीय विद्वेष और संकीर्णताओं में बाँटने के प्रयास किए जा रहे हैं, तब ऐसे प्रयास ही हैं जो समाज को एकजुट रखने में सहायक बनते हैं।

युवा वर्ग से विशेष अपील की गई कि वे आधुनिक तकनीक और डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर इन महान व्यक्तित्वों के विचारों का प्रचार-प्रसार करें ताकि नई पीढ़ी उनके संघर्ष और मूल्यों को समझ सके। आज का युवा यदि जिजाऊ, फुले, शाहू और आंबेडकर के विचारों से प्रेरणा लेकर कार्य करेगा तो भारत एक सशक्त, समतामूलक और शिक्षित राष्ट्र के रूप में विश्व के सामने उदाहरण बनकर उभरेगा।

इस प्रकार बल्लारपुर नगर में आज का यह आयोजन केवल एक स्वागत समारोह नहीं था, बल्कि यह सामाजिक क्रांति के एक नए चरण की शुरुआत थी। रथयात्रा के माध्यम से विचारों का जो संदेश जनमानस तक पहुँचा, वह आने वाले समय में समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सहायक सिद्ध होगा। जब समाज में सभी वर्ग, समुदाय और विचारधाराएँ मिलकर सामाजिक सुधार के कार्यों में जुट जाते हैं, तभी सच्चे अर्थों में राष्ट्र निर्माण संभव होता है।

इस अवसर पर उपस्थित सभी नागरिकों ने एकजुट होकर यह प्रण लिया कि वे इन विचारों को अपने जीवन में आत्मसात करेंगे, और अपने आस-पास के लोगों को भी प्रेरित करेंगे। यह रथयात्रा न केवल विचारों की यात्रा थी, बल्कि यह आत्म-चिंतन, समाज-चिंतन और राष्ट्र-निर्माण की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।

बल्लारपुर नगर ने आज यह सिद्ध कर दिया कि सामाजिक एकता, विचारों की साझेदारी और जनजागरण के प्रयासों में उसकी भूमिका सदैव अग्रणी रही है और आगे भी रहेगी।

संवाददाता – आवाज माझा समाचार पोर्टल, बल्लारपुर
समाप्त

संवाददाता: शहीद शेख
आवाज़ माझा समाचार | बल्लारपुर ब्यूरो

 

 

Awaz Mazha
Author: Awaz Mazha

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