बल्लारपुर (ता.पं.) — बदलते पर्यावरणीय संकट और जल संकट की पृष्ठभूमि में कर्मवीर विद्यालय येनबोडी ने एक अनुकरणीय कदम उठाते हुए “जलपात्र वितरण कार्यक्रम” का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों में जल के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना, प्लास्टिक के अत्यधिक उपयोग को रोकना तथा पर्यावरण के प्रति उत्तरदायित्व की भावना का संचार करना था। विद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों और समाजसेवियों की गरिमामयी उपस्थिति ने इसे और भी प्रभावशाली बना दिया।
इस सराहनीय कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध समाजसेवी अधिवक्ता डॉ. वाकिफ शेख थे, जिन्होंने अपने प्रेरणादायी वक्तव्य के माध्यम से विद्यार्थियों को जल की महत्ता के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जल संकट केवल गांवों या शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक समस्या बन चुकी है। उन्होंने यह भी बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी हजारों परिवारों को स्वच्छ पेयजल के लिए संघर्ष करना पड़ता है। ऐसे में यदि विद्यार्थी छोटी उम्र से ही जल के मूल्य को समझें और उसका संरक्षण करें, तो एक नई जागरूक पीढ़ी का निर्माण संभव है।
डॉ. शेख ने छात्रों से आग्रह किया कि वे प्रतिदिन घर से अपना जलपात्र लाएं और विद्यालय में प्लास्टिक की बोतलों या डिस्पोजेबल गिलास का उपयोग न करें। इससे न केवल वे स्वच्छ पानी का सेवन कर सकेंगे, बल्कि प्लास्टिक प्रदूषण को भी कम किया जा सकेगा। उन्होंने कहा, “जल एक अनमोल संसाधन है, जिसका संरक्षण आज की सबसे बड़ी ज़रूरत है। यदि हम आज नहीं जागे, तो आने वाली पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेंगी।”
कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के मुख्याध्यापक श्री प्रविण शिंदे ने की। उन्होंने इस पहल के पीछे की सोच साझा करते हुए बताया कि विद्यालय में हर वर्ष गर्मियों के समय बच्चों को स्वच्छ पानी पीने में कठिनाई होती है। कई बार वे डिस्पोजेबल गिलास का उपयोग करते हैं, जो कि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है और पर्यावरण के लिए नुकसानदायक भी। इसी बात को ध्यान में रखते हुए, विद्यालय ने इस वर्ष से यह पहल शुरू की है कि हर विद्यार्थी अपना स्वयं का जलपात्र लाए और उसका उपयोग करे।
श्री शिंदे ने बताया कि इस कार्यक्रम को केवल एक दिन की गतिविधि न मानते हुए इसे दीर्घकालिक अभियान के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि विद्यालय प्रशासन भविष्य में इस प्रकार के और भी कार्यक्रम आयोजित करेगा, जिसमें पर्यावरण, स्वच्छता, जलसंवर्धन, ऊर्जा संरक्षण जैसे विषयों पर छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान और सहभागिता के अवसर दिए जाएंगे।
इस अवसर पर मुर्तुजा शेख, विनायक सातव, शाहरुख खान, इमरान खान तथा विद्यालय के अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं भी उपस्थित थे। सभी ने अपने-अपने विचार रखते हुए जलसंवर्धन के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने बच्चों को प्रेरित किया कि वे जल की एक-एक बूंद की कद्र करें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती पूजन और स्वागत गीत से हुई, जिसके पश्चात जलपात्र वितरण की प्रक्रिया प्रारंभ हुई। विद्यालय के वरिष्ठ छात्रों ने अनुशासित ढंग से कतारबद्ध होकर जलपात्र प्राप्त किए। कार्यक्रम के दौरान बच्चों के चेहरों पर उत्साह और गंभीरता दोनों देखी जा सकती थी। बच्चों को यह बात स्पष्ट रूप से समझाई गई कि यह केवल जलपात्र लेने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी को स्वीकार करने का प्रतीक है।
छात्रा आराध्या देशमुख ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, “आज का कार्यक्रम हमें बहुत कुछ सिखा गया। अब से मैं हर दिन जलपात्र लाऊंगी और कोशिश करूंगी कि घर में भी पानी की बर्बादी न हो।” वहीं छात्र आदित्य गाडे ने कहा कि इस कार्यक्रम से उन्हें समझ आया कि छोटी-छोटी आदतें कैसे बड़े बदलाव ला सकती हैं।
कार्यक्रम के अंत में प्रधानाचार्य श्री प्रविण शिंदे ने सभी उपस्थित अतिथियों, सहयोगी शिक्षकों और विशेष रूप से छात्रों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने सभी से यह संकल्प लेने का अनुरोध किया कि वे न केवल विद्यालय में, बल्कि अपने घर, मोहल्ले और समाज में भी जलसंवर्धन के लिए कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल ज्ञान का मंदिर नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की प्रयोगशाला है, और इस प्रकार की पहल से ही एक नई सोच और बेहतर भविष्य की नींव रखी जा सकती है।
कार्यक्रम का सफल संचालन शिक्षिका श्रीमती वैशाली मेश्राम ने किया, जबकि आयोजन की रूपरेखा श्री इमरान खान और विनायक सातव ने तैयार की थी। कार्यक्रम के समापन पर विद्यार्थियों और अतिथियों को नींबू पानी वितरित किया गया और “पानी बचाओ, जीवन बचाओ” के नारे के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।
निष्कर्ष:
कर्मवीर विद्यालय येनबोडी का यह प्रयास न केवल प्रशंसा के योग्य है, बल्कि इसे अन्य विद्यालयों और संस्थानों द्वारा अपनाया जाना चाहिए। “जलपात्र वितरण कार्यक्रम” एक प्रतीक है उस सामाजिक और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व का, जो प्रत्येक विद्यार्थी और नागरिक के भीतर होना चाहिए। यदि विद्यालय स्तर पर ही बच्चों को जल और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाया जाए, तो निश्चित रूप से भविष्य की पीढ़ी अधिक जागरूक, जिम्मेदार और प्रकृति-प्रेमी होगी।







