महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव का एक और दर्दनाक मामला सामने आया है। बल्लारपुर वन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बीट नंबर 104 में मंगलवार सुबह एक बाघ ने 57 वर्षीय मजदूर लालसिंह मरावी पर हमला कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया। मरावी मध्य प्रदेश के माणिकपुर जिले के निवासी थे और चंद्रपुर में बांस की कटाई के काम में लगे हुए थे।
लालसिंह मरावी अन्य मजदूरों के साथ रोज़ की तरह जंगल में काम कर रहे थे, तभी अचानक बाघ ने उन पर झपट्टा मारा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह हमला बेहद तेज़ और अचानक था, जिससे मरावी को बचाने का कोई मौका नहीं मिल पाया। सूचना मिलते ही वन विभाग की त्वरित प्रतिक्रिया टीम घटनास्थल पर पहुँची और बाघ को घेराबंदी कर बेहोश करने के बाद उसे सुरक्षित रूप से पकड़ लिया गया। उसे ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर, चंद्रपुर में स्थानांतरित किया गया है, जहाँ उसकी निगरानी की जा रही है।
इस घटना से स्थानीय मजदूरों में दहशत फैल गई है। वन विभाग के अधिकारी, जिनमें केंद्रीय चांदा डिवीजन के डीएफओ विक्रम कदम और बल्लारपुर रेंज के आरएफओ भी शामिल थे, मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि बाघ हाल ही में इस क्षेत्र में सक्रिय था और संभवतः भोजन की तलाश में मानव बस्तियों के नज़दीक आ गया।
वन विभाग ने पीड़ित परिवार को सहायता राशि देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मृतक के परिजनों को नियमानुसार मुआवजा दिए जाने की घोषणा की गई है। साथ ही, विभाग यह भी सुनिश्चित करने में जुटा है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। वन विभाग के अनुसार, अब बाघ को एक सुरक्षित स्थान पर रखा जाएगा, और यह तय किया जाएगा कि उसे जंगल में वापस छोड़ा जाए या किसी सुरक्षित रेस्क्यू सेंटर में स्थानांतरित किया जाए।
यह घटना चंद्रपुर क्षेत्र में बाघों की बढ़ती संख्या और उनके मानव बस्तियों के करीब आने की समस्या को फिर से उजागर करती है। स्थानीय लोगों और मजदूरों ने वन विभाग से सुरक्षा के अधिक पुख्ता इंतज़ाम करने की मांग की है।
विशेषज्ञों के अनुसार, वन क्षेत्रों में मानव घुसपैठ और तेजी से घटते जंगलों के कारण बाघों का व्यवहार असामान्य होता जा रहा है, जिससे इस प्रकार की घटनाओं में वृद्धि हो रही है। यह समय है जब वन विभाग को न केवल त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए, बल्कि स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाने चाहिए।
इस घटना ने फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है — क्या हमारे वन्यजीव संरक्षण के प्रयास मानव जीवन की सुरक्षा के साथ संतुलन बनाए रख पा रहे हैं?







