महाराष्ट्र के यवतमाल जिले की 27 वर्षीय अदीबा अनम ने इतिहास रच दिया है। एक ऑटो रिक्शा चालक की बेटी होते हुए भी, उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2024 में 142वीं रैंक हासिल कर राज्य की पहली मुस्लिम महिला IAS अधिकारी बनने का गौरव प्राप्त किया। यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे राज्य के लिए प्रेरणास्पद है।
अदीबा का बचपन यवतमाल के एक साधारण परिवार में बीता, जहाँ उनके पिता अशफाक शेख ऑटो रिक्शा चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते थे। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद, उनके माता-पिता ने शिक्षा को प्राथमिकता दी और अदीबा को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। अदीबा

ने पुणे के एक कॉलेज से गणित में स्नातक की डिग्री प्राप्त की और फिर UPSC की तैयारी में जुट गईं।
उनका सफर आसान नहीं था। पहले दो प्रयासों में असफलता के बावजूद, उन्होंने हार नहीं मानी। तीसरे प्रयास में उन्होंने परीक्षा उत्तीर्ण की, जिससे यह साबित हुआ कि समर्पण और मेहनत से कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
अदीबा की प्रेरणा उनके मामा के NGO में काम करने वाले अधिकारियों से मिली, जहाँ उन्होंने देखा कि एक ईमानदार अधिकारी समाज में कितना बदलाव ला सकता है। उन्होंने कहा, “मैं चाहती हूँ कि कोई भी लड़की अपने सपनों को इसलिए न छोड़े क्योंकि वह कहाँ पैदा हुई है या उसके परिवार की आर्थिक स्थिति कैसी है।”
महाराष्ट्र में मुस्लिम समुदाय की महिलाओं की उच्च प्रशासनिक सेवाओं में भागीदारी कम रही है। अदीबा की इस उपलब्धि ने इस दिशा में एक नया अध्याय शुरू किया है। इससे पहले, सारा रिज़वी (IPS), सैयदा असमा (MPSC) और वसीमा शेख जैसी महिलाओं ने विभिन्न सेवाओं में सफलता प्राप्त की है, लेकिन IAS में यह पहली बार है।
अदीबा का लक्ष्य शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्रों में काम करना है। वह चाहती हैं कि समाज की वंचित महिलाओं को भी अवसर मिलें और वे अपने सपनों को साकार कर सकें।
उनकी इस सफलता पर यवतमाल के लोग गर्व महसूस कर रहे हैं। उनके पिता अशफाक शेख ने कहा, “मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरी बेटी दिल्ली के प्रशासनिक गलियारों तक पहुँचेगी।”
अदीबा की कहानी उन सभी के लिए प्रेरणा है जो कठिनाइयों के बावजूद अपने सपनों को साकार करने का हौसला रखते हैं।







