मई का महीना अपने साथ प्रचंड गर्मी लाता है, और इस बार नौतपा के 9 दिन सूर्य की तपन को और भी तीव्र बनाने वाले हैं। नौतपा, जो हर साल मई के अंत में शुरू होता है, 25 मई 2025 से शुरू होकर 2 जून 2025 तक चलेगा। इन 9 दिनों के दौरान सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है, जिसके कारण तापमान अपने चरम पर पहुंच जाता है। इस दौरान हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और गर्मी से संबंधित अन्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में अपनी और अपने परिवार की सेहत का ख्याल रखना बेहद जरूरी है। ज्योतिष के अनुसार, इस दौरान सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी कम हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप धरती पर तापमान तेजी से बढ़ता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, मई के अंत में सूर्य की किरणें पृथ्वी पर सीधी पड़ती हैं, जिसके कारण उत्तर भारत में तापमान 45 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। इस बार अप्रैल में ही तापमान 40 डिग्री से ऊपर दर्ज किया गया है, जिसके आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि नौतपा के दौरान पारा 47 डिग्री तक जा सकता है। दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में गर्मी और लू का प्रकोप सबसे ज्यादा देखने को मिलेगा। मौसम वैज्ञानिकों ने इसे “हीट वेव” की स्थिति करार दिया है, और अस्पतालों को अलर्ट पर रखा गया है। नौतपा के 9 दिनों में भीषण गर्मी के कारण शरीर पर कई तरह के प्रभाव पड़ते हैं। सबसे आम समस्या डिहाइड्रेशन है, जिसमें शरीर में पानी की कमी हो जाती है। इसके लक्षणों में चक्कर आना, सिरदर्द, थकान, और मुंह का सूखना शामिल है। इसके अलावा, हीट स्ट्रोक एक गंभीर समस्या है, जो शरीर के तापमान को असामान्य रूप से बढ़ा देता है। हीट स्ट्रोक के कारण ऑर्गन फेल होने का खतरा बढ़ जाता है, और कुछ मामलों में यह मृत्यु का कारण भी बन सकता है। गर्मी के कारण त्वचा पर भी बुरा असर पड़ता है। सूर्य की तेज किरणें त्वचा को झुलसा सकती हैं, जिससे सनबर्न, रैशेज, और त्वचा का कालापन बढ़ सकता है। बच्चों और बुजुर्गों को इस दौरान विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है, क्योंकि उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है। गर्भवती महिलाओं को भी इस दौरान बाहर निकलने से बचना चाहिए, क्योंकि गर्मी उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। नौतपा के दौरान अपनी सेहत को सुरक्षित रखने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां और उपाय अपनाने चाहिए। दिनभर में कम से कम 3-4 लीटर पानी पिएं। पानी के अलावा नारियल पानी, नींबू पानी, और छाछ जैसे पेय पदार्थों का सेवन करें। ये शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स को संतुलित रखते हैं और डिहाइड्रेशन से बचाते हैं। सूती और हल्के रंग के कपड़े पहनें, जो पसीने को सोख सकें। टाइट कपड़े पहनने से बचें, क्योंकि वे शरीर को हवा नहीं मिलने देते और गर्मी बढ़ाते हैं। सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें, क्योंकि इस समय सूर्य की किरणें सबसे तेज होती हैं। अगर बाहर जाना जरूरी हो, तो छाता, टोपी, या स्कार्फ का इस्तेमाल करें। बाहर निकलने से पहले कम से कम SPF 30 वाली सनस्क्रीन लगाएं। इससे त्वचा सूर्य की हानिकारक किरणों से बचेगी और सनबर्न का खतरा कम होगा। तैलीय और मसालेदार भोजन से बचें। इसकी बजाय फल, सब्जियां, सलाद, और दही जैसे हल्के आहार लें। तरबूज, खीरा, और संतरे जैसे फल शरीर को ठंडा रखते हैं। दिन में 2-3 बार ठंडे पानी से नहाएं। अगर बाहर से आ रहे हैं, तो तुरंत ठंडे पानी में पैर डालें, इससे शरीर का तापमान कम होगा। अगर आपको तेज सिरदर्द, उल्टी, तेज बुखार, या बेहोशी जैसा महसूस हो, तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। ये हीट स्ट्रोक के लक्षण हो सकते हैं। शराब, कॉफी, और चाय जैसे पेय पदार्थ शरीर को डिहाइड्रेट करते हैं। इनके सेवन से बचें और उनकी जगह पानी या प्राकृतिक पेय पदार्थ चुनें। पंखे, कूलर, या एसी का उपयोग करें। खिड़कियों पर मोटे पर्दे लगाएं ताकि धूप अंदर न आए। रात में खिड़कियां खोलकर हवा को अंदर आने दें। बच्चों को बार-बार पानी पिलाएं और उन्हें धूप में खेलने न दें। बुजुर्गों को हल्का भोजन दें और उनके कमरे को ठंडा रखें। ज्योतिष शास्त्र में नौतपा को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इन 9 दिनों में सूर्य की तपन धरती को शुद्ध करती है। इस दौरान कुछ लोग दान-पुण्य और धार्मिक कार्य करते हैं, क्योंकि ऐसा करने से मान-सम्मान और समृद्धि की प्राप्ति होती है। कुछ लोग इस दौरान लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने के लिए विशेष उपाय करते हैं, जैसे मिट्टी के घड़े में पानी भरकर राहगीरों को पिलाना। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि इस बार नौतपा के दौरान तापमान 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, और गुजरात जैसे राज्यों में पारा 50 डिग्री तक जा सकता है। दिल्ली-एनसीआर में भी तापमान 45 डिग्री से ऊपर रहने की संभावना है। इस दौरान लू की स्थिति बनी रहेगी, जिसके कारण बाहर निकलना मुश्किल हो सकता है। नौतपा के दौरान बढ़ते तापमान को देखते हुए अस्पतालों को अलर्ट पर रखा गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों को निर्देश दिए हैं कि वे हीट स्ट्रोक के मरीजों के लिए विशेष वार्ड तैयार करें। दिल्ली के अस्पतालों में पहले से ही हीट स्ट्रोक के मरीजों की संख्या में वृद्धि देखी गई है। एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि पिछले हफ्ते हीट स्ट्रोक के 20 से ज्यादा मामले सामने आए हैं। लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। गर्मी के कारण त्वचा पर रैशेज, सनबर्न, और कालापन बढ़ सकता है। त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए हर 4 घंटे में सनस्क्रीन दोबारा लगाएं। चेहरे को ढकने के लिए स्कार्फ या टोपी का इस्तेमाल करें। रात को सोने से पहले चेहरे को ठंडे पानी से धोएं और मॉइस्चराइजर लगाएं। एलोवेरा जेल का उपयोग सनबर्न को ठीक करने में मदद करेगा। बच्चों को धूप में खेलने से रोकें और उन्हें बार-बार पानी पिलाएं। अगर आपके पास पालतू जानवर हैं, तो उनकी भी देखभाल करें। उनके लिए ठंडी जगह सुनिश्चित करें और उनके पानी के बर्तन को बार-बार भरें। पालतू जानवरों को दोपहर में टहलाने से बचें, क्योंकि गर्म सड़कें उनके पंजों को जला सकती हैं। मान्यता है कि नौतपा की गर्मी मानसून की बारिश को प्रभावित करती है। अगर इन 9 दिनों में बादल छाए रहते हैं या बारिश होती है, तो मानसून कमजोर हो सकता है। लेकिन अगर गर्मी अपने चरम पर रहती है, तो मानसून अच्छा होने की संभावना बढ़ती है। इस बार मौसम वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि नौतपा के बाद जून के मध्य तक मानसून बिहार, उत्तर प्रदेश, और दिल्ली में दस्तक दे सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि नौतपा के दौरान सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। डॉ. अनिल शर्मा, जो दिल्ली के एक सरकारी अस्पताल में कार्यरत हैं, ने कहा कि हीट स्ट्रोक को हल्के में न लें। अगर किसी को तेज बुखार, उल्टी, या बेहोशी जैसा लगे, तो उसे तुरंत ठंडे पानी से नहलाएं और अस्पताल ले जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि बुजुर्गों और बच्चों को इस दौरान विशेष देखभाल की जरूरत होती है। नौतपा के दौरान हल्का और पौष्टिक भोजन लेना चाहिए। नाश्ते में दही, फल, और सलाद शामिल करें। दोपहर में भारी भोजन से बचें और रात को हल्का खाना खाएं। सत्तू का शरबत, जो बिहार और उत्तर प्रदेश में लोकप्रिय है, इस दौरान शरीर को ठंडा रखने में मदद करता है। मसालेदार भोजन, तला हुआ खाना, और शराब से परहेज करें, क्योंकि ये शरीर में गर्मी बढ़ाते हैं। भारत में नौतपा का सांस्कृतिक महत्व भी है। इस दौरान लोग कई धार्मिक कार्य करते हैं। कुछ लोग सूर्य देव की पूजा करते हैं और जल दान करते हैं। मिट्टी के घड़ों में पानी भरकर राहगीरों को पिलाना एक आम प्रथा है, जिसे पुण्य का कार्य माना जाता है। कई लोग इस दौरान शनि देव की पूजा भी करते हैं, क्योंकि मान्यता है कि नौतपा में शनि भगवान की कृपा प्राप्त की जा सकती है। गर्मी के कारण मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है। तेज गर्मी में चिड़चिड़ापन, तनाव, और थकान बढ़ सकती है। ऐसे में योग और ध्यान का सहारा लें। सुबह या शाम के समय प्राणायाम और अनुलोम-विलोम करें। इससे मन शांत रहता है और तनाव कम होता है। बच्चों को घर पर रचनात्मक गतिविधियों में व्यस्त रखें ताकि वे गर्मी से परेशान न हों। नौतपा 2 जून 2025 को समाप्त होगा, और इसके बाद तापमान में धीरे-धीरे कमी आने की उम्मीद है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि जून के मध्य तक मानसून उत्तर भारत में प्रवेश करेगा, जिससे गर्मी से राहत मिलेगी। हालांकि, तब तक सावधानी बरतना जरूरी है। नौतपा के 9 दिन हर साल एक चुनौती लेकर आते हैं, लेकिन सही सावधानियों के साथ इस गर्मी को आसानी से झेला जा सकता है। हाइड्रेशन, हल्का भोजन, और धूप से बचाव इस दौरान सबसे महत्वपूर्ण हैं। अपनी और अपने परिवार की सेहत का ख्याल रखें, और अगर कोई स्वास्थ्य समस्या दिखे, तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। इस नौतपा में सुरक्षित रहें और स्वस्थ रहें।







