बिहार में बदलाव की बयार: सिताब दियारा से शुरू हुई प्रशांत किशोर की ऐतिहासिक यात्रा
बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में एक नई हलचल आज तब शुरू हुई जब रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर ने सारण जिले के सिताब दियारा से ‘बिहार बदलाव यात्रा’ की शुरुआत की। यह कोई साधारण यात्रा नहीं है, बल्कि एक ऐसी पहल है जो राज्य के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक भविष्य को नई दिशा देने का संकल्प लेकर शुरू की गई है।
सिताब दियारा, वही ऐतिहासिक स्थान जहां स्वतंत्रता संग्राम के महान नेता और ‘संपूर्ण क्रांति’ के जनक लोकनायक जयप्रकाश नारायण का जन्म हुआ था। उसी पुण्य भूमि से बिहार में बदलाव का बिगुल फूंका गया है। प्रशांत किशोर का इस स्थान से अपनी यात्रा
शुरू करना प्रतीकात्मक ही नहीं, बल्कि एक गहरे विचार और उद्देश्य से प्रेरित है — यह संदेश देने के लिए कि यह अभियान भी किसी सामान्य राजनीतिक यात्रा से बढ़कर है, यह एक जनआंदोलन की शुरुआत है।
यात्रा का उद्देश्य
प्रशांत किशोर ने घोषणा की है कि इस यात्रा के माध्यम से वे आगामी 120 दिनों में बिहार की सभी 243 विधानसभा क्षेत्रों का दौरा करेंगे। इस दौरान वे हर क्षेत्र की सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक परिस्थिति को जानने की कोशिश करेंगे। किसानों की समस्याएं, युवाओं की बेरोजगारी, शिक्षा की बदहाली, स्वास्थ्य सेवाओं की दुर्दशा और बिहार में पलायन जैसे मुद्दों पर सीधे जनता से संवाद करेंगे।
इस यात्रा का मूल उद्देश्य जनता से जुड़कर उनके विचारों और आकांक्षाओं को समझना है, ताकि एक सशक्त, समावेशी और व्यवहारिक राजनीतिक विकल्प बिहार को मिल सके।
क्यों खास है यह यात्रा?
यह यात्रा इसलिए भी विशिष्ट मानी जा रही है क्योंकि प्रशांत किशोर अब तक देश के कई बड़े नेताओं और दलों के चुनाव अभियानों के रणनीतिकार रहे हैं। उन्होंने खुद को राजनीति से दूर रखकर पर्दे के पीछे रहकर कार्य किया है, लेकिन अब वह खुद बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय लिखने के लिए सक्रिय रूप से आगे आए हैं।
उनकी यह यात्रा केवल प्रचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक जनसंपर्क अभियान है जिसमें वे सीधे जनता के बीच जाकर संवाद कर रहे हैं। वे महंगे रोडशो या मंचीय भाषणों से परहेज कर जमीनी हकीकत को जानने के लिए गांव-गांव, गली-गली में जाकर लोगों से मिल रहे हैं।
लोकनायक की प्रेरणा
जयप्रकाश नारायण की विचारधारा और उनके नेतृत्व में चलाए गए आंदोलनों से प्रेरित होकर प्रशांत किशोर ने इस यात्रा की शुरुआत की है। जेपी आंदोलन ने 1970 के दशक में जिस तरह बिहार की राजनीति में युवाओं की भागीदारी को बढ़ाया और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाई, प्रशांत किशोर भी उसी तर्ज पर बिहार के युवाओं को जागरूक और संगठित करना चाहते हैं।
उनका मानना है कि बदलाव केवल नारों से नहीं आता, उसके लिए जमीन पर काम करना होता है, और यही कारण है कि वे पूरे राज्य में घूमकर वास्तविक समस्याओं को समझने और समाधान खोजने की पहल कर रहे हैं।
क्या है अगला कदम?
इस यात्रा के बाद प्रशांत किशोर अपने संगठन ‘जन सुराज’ के माध्यम से बिहार में एक नई राजनीतिक पार्टी के गठन की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं। यह पार्टी पारंपरिक राजनीति से अलग, विचार आधारित, जनसंपर्क पर आधारित और समाधान केंद्रित होगी।
उनका उद्देश्य न सिर्फ चुनाव लड़ना है, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था तैयार करना है जो जनता की भागीदारी से संचालित हो और जिसका एजेंडा केवल सत्ता नहीं, बल्कि सेवा हो।
जनता की प्रतिक्रिया
प्रशांत किशोर की इस यात्रा को लेकर बिहार की जनता में खासा उत्साह देखा जा रहा है। खासकर युवाओं में उनके प्रति आकर्षण है, क्योंकि वे उन्हें एक वैकल्पिक और व्यावहारिक नेता के रूप में देख रहे हैं।
कई क्षेत्रों में लोगों ने उन्हें हाथों-हाथ लिया है, खुले दिल से स्वागत किया है और अपने विचार साझा किए हैं। यह जुड़ाव बताता है कि लोग पारंपरिक राजनीति से ऊब चुके हैं और अब एक बदलाव की उम्मीद लगाए बैठे हैं।








