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भारत-पाकिस्तान विराम के बाद भी क्यों कायम है तनाव?

भारत-पाकिस्तान संघर्ष विराम के बाद भी क्यों अनसुलझे हैं कई सवाल?

भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों का इतिहास टकराव और तनाव से भरा रहा है। 1947 में विभाजन के बाद से अब तक दोनों देशों के बीच कई युद्ध, सीमा झड़पें और कूटनीतिक विवाद हो चुके हैं। हालांकि 2021 में दोनों देशों ने संघर्ष विराम पर सहमति जताई थी, जिसे एक बड़ा सकारात्मक कदम माना गया। लेकिन क्या यह संघर्ष विराम वास्तव में शांति की शुरुआत है या केवल एक अस्थायी समाधान?

इस सवाल का जवाब ढूंढने के लिए हमें उन गहराई से जड़ें जमाए हुए वि

वादों को समझना होगा जो भारत-पाकिस्तान संबंधों में बाधा बने हुए हैं।


संघर्ष विराम: एक संक्षिप्त पृष्ठभूमि

फरवरी 2021 में भारत और पाकिस्तान की सेनाओं ने संघर्ष विराम समझौते का दोहराव किया और नियंत्रण रेखा (LoC) पर गोलाबारी को रोकने पर सहमति बनाई। इस घोषणा को दोनों देशों के लिए एक “मूलभूत शांति प्रयास” के रूप में देखा गया। इसके बाद सीमा पर संघर्ष की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी देखी गई।

लेकिन यह संघर्ष विराम सैन्य सीमित सहमति थी — राजनीतिक, सामाजिक और रणनीतिक स्तर पर संबंध अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं।


अनसुलझे प्रश्न और मुद्दे

1. कश्मीर मुद्दा अब भी केंद्र में

कश्मीर का मुद्दा भारत-पाक संबंधों की जड़ में बैठा सबसे बड़ा विवाद है। पाकिस्तान इसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दा मानता है, जबकि भारत इसे आंतरिक मामला कहता है। 2019 में भारत द्वारा अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से यह विवाद और तीव्र हो गया है। पाकिस्तान इस कदम का कड़ा विरोध करता रहा है।

2. आतंकवाद और सीमा पार घुसपैठ

भारत का आरोप है कि पाकिस्तान आतंकवादियों को सीमा पार कराकर भारत में अशांति फैलाता है। पुलवामा हमला और उरी हमला जैसी घटनाओं ने दोनों देशों के बीच विश्वास को बुरी तरह झकझोर दिया। जब तक पाकिस्तान आतंक के ढांचे पर कठोर कार्रवाई नहीं करता, भारत-पाक रिश्तों में स्थायी सुधार की संभावना सीमित रहेगी।

3. राजनीतिक संवाद का अभाव

2015 के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच कोई भी सार्थक द्विपक्षीय वार्ता नहीं हुई है। कूटनीतिक स्तर पर वार्ताओं का ठहराव संबंधों को और अधिक जटिल बना रहा है। राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी दोनों तरफ दिखाई देती है।

4. जनता और मीडिया की भूमिका

दोनों देशों में मीडिया अक्सर राष्ट्रवाद को हवा देता है। इससे जनमानस में नफरत और अविश्वास की भावना और गहरी होती है। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर फेक न्यूज और भड़काऊ कंटेंट भी रिश्तों को बिगाड़ने में बड़ी भूमिका निभाता है।


संघर्ष विराम के बाद के सकारात्मक संकेत

हालांकि कई मुद्दे अनसुलझे हैं, कुछ सका

रात्मक घटनाएं भी सामने आई हैं:

  • LoC पर शांति: संघर्ष विराम के बाद सीमावर्ती गांवों में सामान्य जीवन लौटना शुरू हुआ है।

  • पाकिस्तान की कोविड सहायता पेशकश: महामारी के दौरान पाकिस्तान ने भारत को मदद की पेशकश की थी — यह मानवीय पहल थी, भले ही आधिकारिक स्तर पर कोई क्रियान्वयन न हुआ हो।

  • खेल और कला के क्षेत्र में थोड़ी नरमी: कुछ क्रिकेट टूर्नामेंटों और फिल्म रिलीज़ में नरमी के संकेत मिले हैं।


क्या संघर्ष विराम स्थायी समाधान बन सकता है?

संघर्ष विराम एक सकारात्मक कदम ज़रूर है, लेकिन जब तक दोनों देशों के बीच

 जटिल मुद्दों को हल नहीं किया जाता — जैसे कि कश्मीर, आतंकवाद और कूटनीतिक वार्ता — तब तक यह केवल एक अस्थायी “सीज़फायर” ही बना रहेगा।

विशेषज्ञों की राय:

  • संघर्ष विराम को मजबूत करने के लिए नियमित सैन्य और कूटनीतिक संवाद जरूरी है।

  • सीमा पर निगरानी, भरोसे की बहाली और व्यापारिक संबंधों की पुनः शुरुआत जैसे कदम मददगार हो सकते हैं।

  • नागरिक समाज और मीडिया को भी जिम्मेदारी के साथ भूमिका निभानी होगी।


भारत और पाकिस्तान: आगे की राह

1. Track-II Diplomacy को बढ़ावा:

सरकारी चैनलों के अलावा बुद्धिजीवी, कलाकार, पत्रकारों और शिक्षाविदों के माध्यम से आपसी समझ को बेहतर किया जा सकता है।

2. व्यापार और वीजा नियमों में नरमी:

व्यापारिक संबंध और लोगों का आपसी आना-जाना बढ़ेगा तो सामाजिक संबंध बेहतर होंगे।

3. शिक्षा और युवा संवाद:

दोनों देशों के युवाओं को एक-दूसरे की संस्कृति, इतिहास और सोच को समझने के लिए साझा मंच देना चाहिए।

 

Awaz Mazha
Author: Awaz Mazha

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