सरकारी नौकरी के नाम पर 500 लोगों से ठगी: फर्जी वेबसाइट से चल रहा था करोड़ों का घोटाला, मास्टरमाइंड समेत दो गिरफ्तार
प्रस्तावना: जब उम्मीदें बन जाएं धोखा
भारत में सरकारी नौकरी आज भी लाखों युवाओं के लिए एक सपने जैसी होती है। अभिभावकों की उम्मीदें, जीवन की स्थिरता और सामाजिक प्रतिष्ठा—सरकारी नौकरी कई चीजों का प्रतीक है। लेकिन जब इसी सपने को अपराधी हथियार बना लें और युवाओं की मेहनत और विश्वास को ठगने के लिए इस्तेमाल करें, तो यह एक गहरी सामाजिक समस्या बन जाती है।
हाल ही में दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे ही संगठित साइबर ठग गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो फर्जी वेबसाइट बनाकर लोगों को सरकारी नौकरी का झांसा देता था। इस गिरोह ने अब तक 500 से ज्यादा बेरोजगार युवाओं को ठगा, और करो
ड़ों रुपये की धोखाधड़ी की।
कैसे सामने आया मामला?
इस ठगी की शुरुआत तब उजागर हुई जब कुछ पीड़ितों ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। सभी ने बताया कि उन्हें एक वेबसाइट के जरिए सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करने का मौका मिला था। वेबसाइट एकदम असली सरकारी पोर्टल की तरह दिखती थी—लोगो, यूजर इंटरफेस, आवेदन प्रक्रिया सब कुछ।
लोगों से पहले आवेदन शुल्क लिया गया, फिर इंटरव्यू कॉल, और अंत में फर्जी नियुक्ति पत्र भेजकर रकम ऐंठी गई। जब कई हफ्तों बाद भी कोई नियुक्ति नहीं हुई और संबंधित सरकारी विभाग से पुष्टि की गई, तब जाकर असलियत का पता चला।
गिरफ्तारी और मास्टरमाइंड की पहचान
दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए
दो लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें एक मुख्य मास्टरमाइंड है, जिसकी पहचान राजीव शर्मा (काल्पनिक नाम) के रूप में हुई है। यह व्यक्ति आईटी में प्रशिक्षित है और पहले भी ऐसे अपराधों में लिप्त रह चुका है।
दूसरा आरोपी उसका साथी है जो पीड़ितों से संपर्क बनाता था और “HR एक्जीक्यूटिव” बनकर लोगों को भरोसे में लेता था।
फर्जी वेबसाइट कैसे करती थी काम?
यह गिरोह इतनी चालाकी से काम कर रहा था कि सामान्य व्यक्ति को असली और नकली वेबसाइट में फर्क करना मुश्किल हो जाता। तकनीकी तरीके से उन्होंने सरकारी संस्थानों की हूबहू नकल की हुई वेबसाइटें तैयार कीं, जिनमें:
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.gov जैसी डोमेन दिखाने के लिए Unicode ट्रिक
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सरकारी लोगो और फॉर्मेट
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आवेदन, एडमिट कार्ड, इंटरव्यू कॉल लेटर जैसे पेज
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टोल फ्री नंबर और ईमेल आईडी
इन सबका इस्तेमाल करके
उन्होंने पूरी प्रक्रिया को वास्तविक जैसा बना दिया।
पीड़ितों से कैसे वसूली जाती थी रकम?
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रजिस्ट्रेशन फीस: ₹500–₹1000
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इंटरव्यू शुल्क: ₹2000–₹5000
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सिक्योरिटी डिपॉजिट: ₹20,000–₹50,000
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फाइनल अपॉइंटमेंट लेटर के नाम पर: ₹1 लाख तक
इस तरह से हर पीड़ित से औसतन ₹50,000 तक की वसूली की गई।
500 से ज्यादा लोग बने शिकार
जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने अलग-अलग राज्यों के युवाओं को निशाना बनाया—उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा जैसे राज्यों में सबसे अधिक शिकायतें दर्ज हुईं। पुलिस को अभी और शिकायतें मिलने की आशंका है।
पुलिस की जांच में क्या सामने आया?
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फर्जी वेबसाइटों की संख्या: 6 से ज्यादा
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ठगी की कुल राशि: लगभग ₹3.5 करोड़
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बैंक खाते और UPI IDs फर्जी नामों से रजिस्टर्ड
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सोशल मीडिया विज्ञापन के जरिए प्रचार
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इंटरव्यू वीडियो कॉल के जरिए लिए जाते थे, जिसमें “सिस्टम” का भरोसा जताया जाता
साइबर ठगी की नई परिभाषा
यह केस साइबर ठगी के नए और खतरनाक रूप को दिखाता है। सिर्फ कॉल और एसएमएस के जरिए नहीं, अब अपराधी टेक्नोलॉजी की मदद से विश्वसनीय माहौल बनाकर बड़े पैमाने पर लोगों को चूना लगा रहे हैं।
कानूनी कार्रवाई और अगला कदम
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ IPC की कई धाराओं में केस दर्ज किया है, जिनमें शामिल हैं:
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धोखाधड़ी (420)
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आपराधिक षड्यंत्र (120B)
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आईटी एक्ट की धाराएं
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पहचान छुपाने और गलत दस्तावेज़ प्रस्तुत करने के आरोप
इसके अलावा पुलिस अब फॉरेंसिक आईटी ऑडिट कर रही है, ताकि और जानकारी सामने लाई जा सके। जिन लोगों ने रकम ट्रांसफर की थी, उनके अकाउंट और डिजिटल लेन-देन की भी जांच चल रही है।
पीड़ितों के लिए क्या सलाह?
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सरकारी वेबसाइटें हमेशा gov.in या nic.in पर ही होती हैं
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नौकरी के लिए कोई भी एजेंसी आपसे रकम नहीं मांगती
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यदि कोई संदेह हो, तो संबंधित विभाग से ईमेल या फोन पर पुष्टि करें
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सोशल मीडिया विज्ञापनों से सतर्क रहें
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OTP, UPI और बैंक जानकारी कभी साझा न करें








