ट्रंप गजब हैं! दूसरे देश की तस्वीरें दिखाकर झूठ-मूठ घेर लिया दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति को
हाल ही में अमेरिका
के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर एक बार अपने विवादास्पद बयानों से दुनिया को चौंका दिया। इस बार उनका निशाना बना दक्षिण अफ्रीका और वहां के राष्ट्रपति। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि ट्रंप ने जो त
स्वीरें और वीडियो क्लिप दिखाई, वे असल में दक्षिण अफ्रीका की थीं ही नहीं!
यह सब तब शुरू हुआ जब ट्रंप ने एक जनसभा में भाषण देते हुए दावा किया कि दक्षिण अफ्रीका में
“श्वेत किसानों” पर अत्याचार हो रहे हैं। उन्होंने कुछ तस्वीरें भी साझा कीं जिनमें हिंसा और अराजकता के दृश्य थे। लेकिन जल्द ही मीडिया और फैक्ट-चेकर्स ने यह सिद्ध कर दिया कि वे तस्वीरें दक्षिण अफ्रीका की नहीं थीं—बल्कि वे ब्राज़ील और नाइजीरिया जैसी जगहों की थीं।
ट्रंप का दावा – झूठ का पर्दाफाश
ट्रंप ने कहा कि “दक्षिण अफ्रीका में एक साजिश के तहत श्वेत अल्पसंख्यकों की ज़मीन छीनी जा रही है और उन पर हिंसा की जा रही है।” इसके समर्थन में उन्होंने कुछ भयावह तस्वीरें और वीडियो साझा किए। ये दावा न केवल गंभीर था, बल्कि उसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी चिंतित कर दिया।
लेकिन जब पत्रकारों और स्वतंत्र फैक्ट-चेक संस्थानों ने उन तस्वीरों की जांच की, तो सच कुछ और ही निकला। पता चला कि जिन तस्वीरों को ट्रंप ने ‘दक्षिण अफ्रीका का सच’ बताया, वे असल में अन्य देशों की थीं। कुछ तस्वीरें ब्राज़ील की थीं, जहां पर अपराध और ग़रीबी की तस्वीरें ली गई थीं। अन्य कुछ तस्वीरें वर्षों पुरानी थीं, जिनका वर्तमान स्थिति से कोई लेना-देना नहीं था।
दक्षिण अफ्रीका की प्रतिक्रिया
दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने इस बयान की तीव्र निंदा की। उन्होंने कहा कि ट्रंप का बयान “गैर-जिम्मेदाराना” और “राजनीतिक लाभ के लिए फैलाई गई अफवाह” है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दक्षिण अफ्रीका में ज़मीन सुधार की प्रक्रिया शांतिपूर्ण और न्यायपूर्ण तरीके से की जा रही है।
रामाफोसा सरकार ने अमेरिका से औपचारिक स्पष्टीकरण भी मांगा और कहा कि झूठी सूचनाएं अंतरराष्ट्रीय संबंधों को खराब कर सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे बयान नस्लीय तनाव को बढ़ावा दे सकते हैं, जो कि लोकतंत्र और सामाजिक सौहार्द के लिए खतरा है।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं
सोशल मीडिया पर ट्रंप के इस बयान को लेकर भारी प्रतिक्रियाएं आईं। जहां कुछ समर्थकों ने इसे ‘सच का उजागर’ बताया, वहीं बड़ी संख्या में लोगों ने ट्रंप की आलोचना की। ट्विटर, फेसबुक और रेडिट जैसी सोशल मीडिया साइट्स पर हैशटैग #TrumpLiesAgain और #FakeNewsAfrica ट्रेंड करने लगे।
कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने ट्रंप से माफ़ी मांगने की मांग की और मीडिया से इस प्रकार की खबरों को बिना जांचे न फैलाने की अपील की।
यह क्यों खतरनाक है?
इस पूरी घटना से यह स्पष्ट हो जाता है कि राजनीतिक लाभ के लिए झूठे तथ्य और फर्जी तस्वीरों का इस्तेमाल कितना खतरनाक हो सकता है। यह न केवल संबंधित देशों के बीच तनाव बढ़ाता है, बल्कि आम जनता को भी भ्रमित करता है। जब एक शक्तिशाली नेता जैसे ट्रंप गलत जानकारी फैलाता है, तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पड़ता है।
राजनीति में झूठ और उसका असर
राजनीतिक प्रचार में झूठे दावे और तस्वीरों का इस्तेमाल कोई नई बात नहीं है, लेकिन जब यह किसी देश के नेतृत्व से आता है, तो इसकी गंभीरता कई गुना बढ़ जाती है। इससे लोकतंत्र की जड़ें कमजोर होती हैं, मीडिया पर भरोसा टूटता है और समाज में डर और असमंजस का माहौल बनता है।








