भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था क्यों है – न कि चौथी या पाँचवीं?
भारत की अर्थव्यवस्था की तेज़ रफ्तार दुनिया भर का ध्यान खींच रही है। एक समय था जब भारत को “विकासशील देश” कहा जाता था, लेकिन आज यह वैश्विक आर्थिक मंच पर अपनी ताकत से सबको चौंका रहा है। कई रिपोर्ट्स और आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, भारत 2025 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है, अमेरिका और चीन के बाद।
लेकिन सवाल ये है: आख़िर भारत तीसरे स्थान पर कैसे पहुँचा? और क्यों यह देश चौथे या पाँचवें स्थान पर नहीं है? इस सवाल के जवाब में कई आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक कारक शामिल हैं। आइए विस्तार से समझते हैं।
1. स्थायी आर्थिक विकास द
र
भारत की जीडीपी (GDP) दर बीते कई वर्षों से स्थिर और मजबूत रही है। जहाँ विकसित देशों की विकास दर 1-2% के आसपास होती है, वहीं भारत लगातार 6-7% की दर से आगे बढ़ रहा है। यह उच्च विकास दर ही है जिसने भारत को वैश्विक पटल पर आर्थिक महाशक्ति बना दिया है।
2. जनसंख्या लाभांश (Demographic Dividend)
भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी जनसंख्या है — विशेषकर युवा वर्ग। देश की 65% आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है, जो इसे दुनिया का सबसे बड़ा वर्कफोर्स प्रदान करती है। यह कार्यबल न केवल घरेलू स्तर पर उत्पादन बढ़ा रहा है बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तकनीक, सेवा और व्यापार में भारत की भागीदारी को मजबूत कर रहा है।
3. तकनीकी और डिजिटल क्रांति
भारत ने पिछले एक दशक में डिजिटल क्षेत्र में जबरदस्त प्रगति की है। UPI, डिजिटल पेमेंट्स, स्टार्टअप इकोसिस्टम, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में भारत ने बड़ी छलांग लगाई है। आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है।
4. आंतरिक खपत और बाज़ार की ताकत
भारत का घरेलू बाज़ार बहुत विशाल है। देश की बढ़ती मध्यमवर्गीय आबादी उपभोग में तेजी ला रही है। विदेशी कंपनियों के लिए भारत एक बड़ा बाज़ार बन चुका है। यह घरेलू खपत भारत की आर्थिक मजबूती का एक बड़ा स्तंभ है।
5. आर्थिक सुधार और नीतियाँ
पिछले कुछ वर्षों में सरकार द्वारा किए गए संरचनात्मक सुधारों ने भारत की आर्थिक नींव को मजबूत किया है। GST, मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत, और PLI स्कीम्स ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है और घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित किया है।
6. विदेशी निवेश में बढ़ोतरी (FDI)
भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में लगातार वृद्धि हो रही है। वैश्विक कंपनियाँ भारत को उत्पादन और सेवा केंद्र के रूप में देख रही हैं। चीन के बाद, भारत अब निवेश के लिए अगली पसंद बन चुका है।
7. बदलता वैश्विक परिदृश्य
यूक्रेन-रूस युद्ध, अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध, और कोविड-19 के बाद की दुनिया में सप्लाई चेन का पुनर्गठन हो रहा है। ऐसे समय में भारत ने खुद को एक वैकल्पिक और भरोसेमंद साझेदार के रूप में स्थापित किया है।
8. शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट में निवेश
भारत सरकार और निजी क्षेत्र दोनों ही शिक्षा और कौशल विकास पर ध्यान दे रहे हैं। इससे न केवल रोजगार बढ़ा है बल्कि उत्पादकता और नवाचार को भी बल मिला है।
9. आर्थिक विविधता
भारत की अर्थव्यवस्था केवल एक क्षेत्र पर निर्भर नहीं है। कृषि, उद्योग, सेवाएं और तकनीक — सभी क्षेत्रों में भारत की पकड़ मजबूत है। यह विविधता ही आर्थिक लचीलापन (resilience) देती है।
10. सांस्कृतिक और भौगोलिक ताकत
भारत की भौगोलिक स्थिति और सांस्कृतिक विविधता उसे वैश्विक व्यापार और पर्यटन का आकर्षक केंद्र बनाती है। यही वजह है कि भारत को आर्थिक महाशक्ति बनने से कोई नहीं रोक पा रहा।







