EMI से बचने के लिए निकाली चालाक तरकीब, लेकिन पुलिस की नजर में नहीं बच पाया ये ‘जुगाड़ू’ आदमी!
आज के समय में जब हर व्यक्ति अपने सपनों की गाड़ी खरी
दने के लिए बैंक लोन का सहारा लेता है, वहीं कुछ लोग किस्तें चुकाने में चूक भी कर जाते हैं। लेकिन इस बार एक शख्स ने Car Loan की EMI से बचने के लिए ऐसी तरकीब अपनाई कि पुलिस तक को हैरानी हो गई। हालांकि उसकी चालाकी ज्यादा देर तक नहीं चल पाई और अंत में उसका ‘जुगाड़’ पकड़ा गया। नतीजा – गाड़ी जब्त, और अब मामला जांच के घेरे में है।
यह घटना भारत के एक प्रमुख शहर की है, जहां एक व्यक्ति ने अपने कार लोन की ईएमआई न देने के लिए जानबूझकर एक फर्जी चोरी की कहानी रची, लेकिन उसकी यह ‘स्क्रिप्ट’ ज्यादा देर तक नहीं चल सकी।
क्या है पूरा मामला?
एक व्यक्ति ने बैंक से फाइनेंस करवाकर एक महंगी कार खरीदी थी। शुरुआती कुछ महीनों तक तो वह ईएमआई समय पर देता रहा, लेकिन फिर किस्तें भरने में असमर्थ होने लगा। बैंक की ओर से बार-बार नोटिस और कॉल आने लगे, जिससे परेशान होकर उसने एक नाटकीय योजना बनाई।
उसने खुद ही अपनी कार को सुनसान इलाके में खड़ी कर दी और फिर पुलिस में कार चोरी की रिपोर्ट दर्ज करवाई। उसका इरादा था कि अगर कार चोरी दिखा दी जाए, तो:
-
बैंक की रिकवरी से बचा जा सके
-
इंश्योरेंस क्लेम भी किया जा सके
-
और भविष्य में कोई पूछताछ न हो**
लेकिन पुलिस ने जब मामले की जांच शुरू की तो कुछ बातों ने शक पैदा कर दिया।
पुलिस को कैसे हुआ शक?
पुलिस ने सबसे पहले:
-
घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज खंगाले
-
मोबाइल लोकेशन से व्यक्ति की मौजूदगी की पुष्टि की
-
और फिर गाड़ी की लोकेशन ट्रेस करने के लिए GPS का इस्तेमाल किया
GPS ट्रैकर से पता चला कि गाड़ी चोरी नहीं हुई थी बल्कि उसे जानबूझकर सुनसान जगह पर पार्क किया गया था। पुलिस जब उस जगह पहुंची तो कार वहीं मौजूद थी, लेकिन उसमें किसी तरह की तोड़फोड़ नहीं थी, न ही ताले टूटे थे।
यही नहीं, कार के अंदर मौजूद दस्तावेज और मोबाइल से कुछ चैट्स और रिकॉर्डिंग्स भी मिलीं, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि व्यक्ति ने ईएमआई से बचने के लिए यह पूरा नाटक रचा था।
क्या कार्रवाई हुई?
जैसे ही पुलिस को इस धोखाधड़ी की पुष्टि हुई:
-
गाड़ी को जब्त कर लिया गया
-
संबंधित व्यक्ति के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में केस दर्ज किया गया
-
इंश्योरेंस कंपनी को भी अलर्ट कर दिया गया
-
बैंक को पूरी रिपोर्ट सौंप दी गई
अब व्यक्ति न केवल अपनी कार से हाथ धो बैठा है, बल्कि उस पर कानूनी कार्रवाई का भी सामना करना पड़ रहा है।
लोन धोखाधड़ी की बढ़ती घटनाएं
यह कोई पहली घटना नहीं है जब किसी ने लोन या ईएमआई से बचने के लिए इस तरह की चालाकी दिखाई हो। बीते कुछ सालों में ऐसी घटनाएं बढ़ी हैं, जिनमें लोग:
-
गाड़ी चोरी की झूठी रिपोर्ट करते हैं
-
फर्जी एक्सीडेंट दिखाकर इंश्योरेंस क्लेम करते हैं
-
या फिर कार को किसी और राज्य में बेच देते हैं
ऐसी हरकतें केवल अपराध नहीं हैं, बल्कि इससे व्यक्ति का क्रेडिट स्कोर भी बुरी तरह प्रभावित होता है, जिससे भविष्य में लोन मिलना मुश्किल हो सकता है।
आंकड़ों पर नजर
-
2023 में भारत में इंश्योरेंस फ्रॉड के मामलों में 18% की बढ़ोतरी दर्ज की गई
-
वाहन लोन डिफॉल्ट का औसत रेट 6.5% तक पहुंच चुका है
-
शहरी इलाकों में प्लांड फ्रॉड केस बढ़ रहे हैं, जहां लोग खुद ही चोरी या एक्सीडेंट की कहानियां गढ़ते हैं
-
समाधान क्या है?
यदि किसी कारणवश ईएमआई भरना संभव नहीं हो पा रहा हो, तो निम्न कदम उठाए जा सकते हैं:
-
बैंक से ईएमआई मोरेटोरियम या री-स्ट्रक्चरिंग की मांग करें
-
सेकंडहैंड मार्केट में गाड़ी बेचकर लोन चुकता करें
-
Loan Takeover ऑप्शन से किसी और को ट्रांसफर करें
-
लेकिन कभी भी धोखाधड़ी जैसा कदम न उठाएं, इससे मामला आपराधिक बन सकता है







