ऑपरेशन शील्ड”: चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा में फिर से ब्लैकआउट, 32,000 नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवक संभालेंगे मोर्चा
देश की उत्तरी सीमा से सटी संवेदनशील स्थिति के बीच, केंद्र सरकार के निर्देश पर आज एक बार फिर “ऑपरेशन शील्ड” के तहत चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा में कृत्रिम ब्लैकआउट किया जाएगा। यह अभ्यास सुरक्षा एजेंसियों, सिविल डिफेंस और राज्य प्रशासन के संयुक्त समन्वय से किया जा रहा है। इस ऑपरेशन में 32,000 नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों की भागीदारी होगी, जो पूरे राज्य में निगरानी, जागरूकता और प्रबंधन की जिम्मेदारी निभाएंगे।
यह अभ्यास केवल एक सुरक्षा ड्रिल नहीं, ब
ल्कि देश की आतंरिक सुरक्षा और नागरिकों की सतर्कता को परखने का प्रयास है। ऑपरेशन शील्ड का मुख्य उद्देश्य संभावित हवाई हमलों, साइबर अटैक्स, और युद्धकालीन स्थिति में नागरिकों की त्वरित प्रतिक्रिया की जांच करना है।
ऑपरेशन शील्ड क्या है?
“ऑपरेशन शील्ड” एक बहुस्तरीय सुरक्षा अ
भ्यास है, जिसका उद्देश्य युद्ध जैसी आपात स्थितियों में नागरिक प्रतिक्रिया प्रणाली को सक्रिय करना है। इसमें शामिल हैं:
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संपूर्ण क्षेत्र का कृत्रिम अंधकार (ब्लैकआउट)
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सायरन और चेतावनी संकेतों का परीक्षण
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सुरक्षा बलों की त्वरित तैनाती प्रक्रिया
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सिविल डिफेंस द्वारा नागरिकों की सुरक्षा व्यवस्था
इस अभ्यास की कल्पना उस समय की गई थी जब देश को सीमावर्ती क्षेत्रों से खतरा बढ़ता जा रहा था। अब इसे नियमित अंतराल पर किया जाता है ताकि सभी एजेंसियाँ तैयार रहें।
किन-किन क्षेत्रों में होगा ब्लैकआउट?
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चंडीगढ़ – शहर का पूरा प्रशासनिक और शहरी क्षेत्र
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पंजाब – अमृतसर, लुधियाना, पठानकोट, बठिंडा जैसे संवेदनशील जिले
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हरियाणा – अंबाला, पानीपत, कुरुक्षेत्र जैसे सीमावर्ती इलाके
ब्लैकआउट का समय रात 9:00 बजे से 9:4
5 बजे तक निर्धारित किया गया है। इस दौरान सभी घरों, दफ्तरों और दुकानों को बत्तियाँ बुझाने, परदे खींचने और आपातकालीन उपकरणों की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
32,000 सिविल डिफेंस स्वयंसेवकों की भूमिका
इस ऑपरेशन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है – नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों (Civil Defence Volunteers) की भागीदारी। इन 32,000 प्रशिक्षित नागरिकों को विभिन्न क्षेत्रों में तैनात किया गया है:
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भीड़भाड़ वाले बाजारों में लोगों को दिशा-निर्देश देना
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रिहायशी इलाकों में गश्त
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इमरजेंसी लाइट्स और सायरन उपकरणों की टेस्टिंग
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नागरिकों को पैनिक से बचाने और अनुशासन बनाए रखने की जिम्मेदारी
यह सभी स्वयंसेवक राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) के सहयोग से प्रशिक्षित किए गए हैं।
सरकार और प्रशासन की ओर से दिशा-निर्देश
सरकार ने पहले ही नागरिकों को सूचित कर दिया है कि यह कोई वास्तविक खतरा नहीं, बल्कि एक रूटीन राष्ट्रीय सुरक्षा अभ्यास है। सभी नागरिकों से अपील की गई है कि वे:
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ब्लैकआउट के समय बत्तियाँ, टीवी, गाड़ियाँ और अन्य प्रकाश उपकरण बंद रखें
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अफवाहों से बचें और केवल सरकारी चैनलों पर भरोसा करें
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बच्चों, बुजुर्गों और रोगियों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें
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किसी भी आपात स्थिति में 112 हेल्पलाइन पर संपर्क करें
अभ्यास के उद्देश्य
इस ऑपरेशन का असल मकसद है:
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नागरिकों की आपदा प्रतिक्रिया क्षमता को मापना
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सुरक्षा बलों और नागरिकों के बीच समन्वय बढ़ाना
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बिजली, संचार और इंटरनेट सेवाओं की निर्भरता को जां
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चना
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किसी हमले की स्थिति में प्राथमिक प्रतिक्रिया की गति और प्रभावशीलता को आंकना
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मनोवैज्ञानिक तैयारी भी है ज़रूरी
इस तरह के अभ्यासों से नागरिकों को मानसिक रूप से तैयार किया जाता है कि अगर वास्तविक युद्ध जैसी स्थिति हो तो कैसे संयम, अनुशासन और सूझबूझ से काम लिया जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी आबादी को कभी भी युद्ध की स्थिति के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं किया गया है, जबकि आज के समय में हाइब्रिड वॉरफेयर और साइबर युद्ध वास्तविक खतरे हैं।
सुरक्षा एजेंसियों का बड़ा नेटवर्क
इस ऑपरेशन में शामिल हैं:
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केंद्रीय गृह मंत्रालय
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राज्य पुलिस बल
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अर्धसैनिक बल
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अग्निशमन और आपदा प्रबंधन विभाग
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नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग
हर विभाग को स्पष्ट भूमिका दी गई है ताकि सर्वांगीण प्रतिक्रिया तंत्र का परीक्षण हो सके।
साइबर टेस्टिंग भी शामिल
इस बार ऑपरेशन में साइबर सुरक्षा पहलुओं को भी शामिल किया गया है। कुछ सरकारी सर्वरों और सिस्टम पर फेक साइबर हमलों का अनुकरण किया जाएगा ताकि देखा जा सके कि किस प्रकार के साइबर रिस्पांस मैकेनिज्म सक्रिय होते हैं।








