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55 साल पहले अमेरिका से मिला हथियार,

ईरान का इज़राइल पर पुराना अमेरिकी हथियार से हमला: इतिहास का सबसे विस्फोटक मोड़?

ईरान और इज़राइल के बीच तनाव अब उस स्तर पर पहुंच चुका है जहां युद्ध जैसे हालात बनते जा रहे हैं। हाल ही में इज़राइल पर हुए मिसाइल हमलों और ड्रोन हमलों ने वैश्विक राजनीति को हिला दिया है। लेकिन इस बार चर्चा का विषय सिर्फ हमला नहीं, बल्कि हमला करने का तरीका और उसका स्रोत भी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने जो हथियार इज़राइल पर इस्तेमाल किए हैं, उनमें से एक विनाशकारी हथियार अमेरिका से करीब 55 साल पहले उसे मिला था।

यह सुनकर दुनिया चौंक

 गई कि कभी अमेरिका द्वारा ईरान को दिया गया घातक हथियार आज उसी अमेरिका के सबसे करीबी सहयोगी इज़राइल के खिलाफ इस्तेमाल हो रहा है। यह एक ऐतिहासिक विडंबना है, जो बताती है कि कैसे अंतरराष्ट्रीय संबंध समय के साथ उलझते और बदलते हैं।

इतिहास की पृष्ठभूमि

1970 के दशक में, अमेरिका और ईरान के बीच मजबूत कूटनीतिक और सैन्य संबंध थे। उस समय ईरान के शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी अमेरिका के भरोसेमंद सहयोगी माने जाते थे। इसी रिश्ते के तहत अमेरिका ने ईरान को कई प्रकार के अत्याधुनिक हथियार, मिसाइल सिस्टम और डिफेंस टेक्नोलॉजी मुहैया करवाई थी। इनमें से कई अब पुराने हो चुके हैं, लेकिन उनमें से कुछ अभी भी अपग्रेड किए गए रूप में ईरानी आर्मी के जखीरे में शामिल हैं।

समय का बदलता चेहरा

1979 में ईरान की इस्लामिक क्रांति के बाद परिस्थितियां पूरी तरह से बदल गईं। शाह को सत्ता से हटाकर अयातुल्ला खुमैनी के नेतृत्व में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की स्थापना हुई, और अमेरिका-ईरान रिश्ते टूट गए। लेकिन तब तक अमेरिका द्वारा दिए गए हथियार और तकनीकें ईरान के पास मौजूद थीं।

इन तकनीकों को ईरान ने वर्षों तक reverse engineer किया, खुद के अनुसंधान केंद्रों में उन्हें विकसित किया, और आज वही हथियार पूरी दुनिया के लिए सिरदर्द बन गए हैं।

आज का परिदृश्य

2025 की शुरुआत में जब इज़राइल पर अचानक मिसाइलों और ड्रोन से हमला हुआ, तो जांच एजेंसियों और रक्षा विशेषज्ञों ने इन हथियारों की संरचना का गहन विश्लेषण किया। सामने आया कि इनमें से कई मिसाइल तकनीकें पुराने अमेरिकी मॉडलों पर आधारित हैं, जो 1960-70 के दशक में ईरान को दी गई थीं।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह “MIM-23 Hawk” जैसी अमेरिकी सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल तकनीक की आधुनिक संस्करण हो सकता है, जिसे ईरान ने अपने हिसाब से अपग्रेड किया है। साथ ही, ड्रोन सिस्टम में भी वे तत्व देखे गए जो अमेरिकी UAV तकनीक से प्रेरित माने जा रहे हैं।

रणनीतिक संकेत

यह घटनाक्रम वैश्विक कूटनीति और रणनीति के लिए एक कड़ा संदेश है। यह केवल हथियारों के ज़खीरे या रक्षा नीति की बात नहीं है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कोई भी तकनीक भविष्य में कैसे पलटवार बन सकती है। अमेरिका की ‘आउटडेटेड’ सहायता आज उसके ही रणनीतिक सहयोगी पर काल बनकर बरसी है।

इस स्थिति ने अमेरिका को असहज कर दिया है। एक ओर वह इज़राइल का सहयोगी है, दूसरी ओर वह खुद अपने अतीत की नीतियों के कारण निशाने पर आ गया है। यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या आने वाले समय में अमेरिका को अपने हथियार निर्यात नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए?

दुनिया की प्रतिक्रिया

इस पूरी घटना पर रूस और चीन जैसे देशों की भी नज़र है, जो वर्षों से ईरान को तकनीकी और सैन्य समर्थन देते आए हैं। अब जब ईरान अमेरिकी हथियार प्रणाली का उपयोग कर रहा है, तो यह वैश्विक सैन्य समीकरणों में नया मोड़ ला सकता है।

भारत सहित कई तटस्थ देश भी इस स्थिति को बारीकी से देख रहे हैं, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों और पुराने समझौतों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

 

Awaz Mazha
Author: Awaz Mazha

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