“प्रलय के विमान” ने भरी उड़ान: अमेरिका ने भेजा संकेत, क्या ईरान-इज़राइल युद्ध में परमाणु विकल्प की तैयारी?
ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव ने दुनिया को एक बार फिर तीसरे विश्वयुद्ध की आशंका से भर दिया है। ऐसे में एक और सनसनीखेज खबर सामने आई है—अमेरिका का “Doomsday Plane” यानी ‘प्रलय का विमान’ आसमान में नजर आया है। यह वही विमान है, जो केव
ल उस समय उड़ाया जाता है जब अमेरिका संभावित परमाणु युद्ध या किसी राष्ट्रीय आपात स्थिति की तैयारी कर रहा होता है।
यह विमान एक तरह से अमेरिका का मोबाइल सैन्य कमांड सेंटर होता है, जो किसी परमाणु हमले या वैश्विक युद्ध की स्थिति में राष्ट्रपति और सेना के उच्चतम अधिकारियों को हवा में रणनीति तय करने और आदेश देने की शक्ति देता है। इसे देख दुनिया भर में सवाल उठने लगे हैं: क्या अब हालात वाकई इतने गंभीर हो चुके हैं? क्या ईरान-इज़राइल संघर्ष में अब परमाणु शक्ति का डर सिर उठाने लगा है?
“Doomsday Plane” क्या है?
इस विमान का असली नाम E-4B Nightwatch है, जो Boeing 747 जंबो जेट पर आधारित है। इसे विशेष रूप से इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह परमाणु हमले या किसी भी उच्चस्तरीय खतरे के बावजूद हवा में सुरक्षित रह सके और अमेरिका की कमांड संरचना को बनाए रख सके।
यह विमान परमाणु विस्फोट की इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स (EMP) से बचने में सक्षम है, इसमें उपग्रह संचार, परमाणु बंकर-जैसी सुरक्षा, और युद्धकालीन निर्णय लेने की तमाम तकनीकें मौजूद हैं। इसे उड़ते हुए “फ्लाइंग पेंटागन” भी कहा जाता है।
क्यों महत्वपूर्ण है इसकी उड़ान?
प्रलय के विमान की उड़ान अमेरिका की रक्षा नीति में अत्यंत गंभीर संकेत माना जाता है। इसे बिना किसी स्पष्ट सैन्य संकट के उड़ाना अमेरिका की सैन्य ताकत को दिखाने का तरीका हो सकता है, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए यह एक सीधा संदेश भी हो सकता है—यदि ईरान और इज़राइल का युद्ध नियंत्रण से बाहर होता है, तो अमेरिका किसी भी संभावना के लिए तैयार है।
ईरान और इज़राइल के बीच हालिया मिसाइल और ड्रोन हमले, साथ ही अमेरिका की ओर से इज़राइल को लगातार समर्थन, अब संघर्ष को वैश्विक रूप देने की कगार पर ले जा रहे हैं। ऐसे में “Doomsday Plane” की उड़ान दुनिया को चेतावनी देने जैसा प्रतीत हो रहा है।
क्या इसका मतलब परमाणु युद्ध की आशंका है?
सीधा जवाब है: अभी नहीं, लेकिन जोखिम तेजी से बढ़ रहा है। इस तरह के विमान की तैनाती केवल रणनीतिक अभ्यास के लिए नहीं होती, बल्कि यह तब सामने आता है जब “worst-case scenario” का आकलन किया जा रहा हो।
ईरान के पास अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाएं हैं, और पश्चिमी देश उस पर लगातार निगरानी बनाए हुए हैं। यदि यह युद्ध और लंबा खिंचता है और अमेरिका या उसके सहयोगी देश प्रत्यक्ष रूप से इसमें शामिल होते हैं, तो हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं।
इसलिए, यह कहना गलत नहीं होगा कि अमेरिका ने अभी से ही “contingency plans” यानी आपातकालीन योजनाओं पर काम शुरू कर दिया है।
वैश्विक संदेश
“Doomsday Plane” केवल अमेरिका के भीतर सैन्य संदेश नहीं है, बल्कि यह रूस, चीन, और विशेषकर ईरान को सीधा संदेश है कि अमेरिका हर हालात के लिए तैयार है। यह एक प्रकार की स्ट्रैटेजिक डिटरेंस (रणनीतिक रोकथाम) की नीति है, जिससे अमेरिका विरोधियों को यह समझाना चाहता है कि कोई भी परमाणु या व्यापक सैन्य दुस्साहस उन्हें भारी पड़ सकता है।
साथ ही यह इज़राइल को भी आश्वासन है कि अमेरिका, यदि स्थिति बिगड़ती है, तो साथ खड़ा रहेगा—वो भी अपने सबसे खतरनाक संसाधनों के साथ।
भारत और शेष दुनिया की चिंता
भारत सहित बाकी दुनिया के लिए यह स्थिति चिंताजनक है। पहले से ही वैश्विक महंगाई, तेल की कीमतों में अस्थिरता और मध्य-पूर्व की राजनीतिक अस्थिरता दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही है। अब यदि इस संघर्ष में परमाणु हथियारों की आशंका भी जुड़ जाए, तो यह एक मानवीय और आर्थिक संकट में बदल सकता है।
भारत हमेशा से युद्ध टालने और शांति की नीति का समर्थन करता आया है। ऐसे में अमेरिका द्वारा “प्रलय का विमान” तैनात किया जाना कूटनीतिक रूप से गंभीर संकेत है।








