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एयर इंडिया हादसे के बाद बदली सोच

एयर इंडिया विमान हादसे के बाद बढ़ी लोगों की सतर्कता: फ्लाइट टिकट बुकिंग से पहले 41% लोग अब कर रहे हैं इस महत्वपूर्ण चीज की जांच

हाल ही में हुए एयर इंडिया विमान हादसे ने यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताओं को जन्म दिया है। जहां इस दुर्घटना ने एक बार फिर हवाई सफर की खामियों को उजागर किया है, वहीं आम यात्रियों के व्यवहार में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।

एक हालिया ऑनलाइन सर्वे में सामने आया है कि अब लगभग 41% लोग अपनी फ्लाइट टिकट बुक करने से पहले विमान की सुरक्षा रेटिंग और एयरलाइन का पिछला रिकॉर्ड चेक कर रहे हैं। यह एक अहम संकेत है कि लोग अब सिर्फ कम कीमत या सुविधाओं के आधार पर उड़ान नहीं चुन रहे, बल्कि सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने लगे हैं।

हादसे ने हिला दी यात्रियों की मानसिकता

एयर इंडिया के इस हालिया हादसे में भले ही जान-माल का बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन सोशल मीडिया और खबरों में इसकी व्यापक कवरेज ने लोगों की मानसिकता पर गहरा असर डाला है। यात्रियों की पहली प्रतिक्रिया अब यही होती है – “क्या यह एयरलाइन सुरक्षित है?”

मीडिया रिपोर्ट्स और यात्रा मंचों (travel forums) पर बड़ी संख्या में यूज़र्स ने यह स्वीकार किया कि वे अब फ्लाइट टिकट बुक करते समय एयरलाइन की सेफ्टी रेटिंग, मेंटेनेंस हिस्ट्री, और DGCA (Directorate General of Civil Aviation) रिपोर्ट्स की जांच करते हैं।

टिकट बुकिंग का नया ट्रेंड: “सेफ्टी फर्स्ट”

कोरोना महामारी के बाद लोगों का ट्रैवल पैटर्न पहले से ही बदल चुका था। अब इस विमान दुर्घटना के बाद ‘सेफ्टी फर्स्ट’ का ट्रेंड तेजी से पॉपुलर हो रहा है। पहले जहाँ लोग ट्रिप प्लान करने में सिर्फ किराया, टाइमिंग और लगेज अलाउंस को प्राथमिकता देते थे, अब एक नया आयाम जुड़ गया है—फ्लाइट और एयरलाइन की सुरक्षा रैंकिंग

एयरलाइनों पर बढ़ा दबाव

इस बदली हुई मानसिकता का सीधा असर भारत की एविएशन इंडस्ट्री पर पड़ा है। एयरलाइंस अब पब्लिक रिलेशन और सेफ्टी ट्रांसपेरेंसी पर अधिक ध्यान देने लगी हैं। एयर इंडिया जैसे ब्रांड, जो एक समय पर गौरव का प्रतीक थे, अब लोगों के भरोसे को पुनः अर्जित करने की जद्दोजहद में हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यात्रियों की इस नई सतर्कता से एयरलाइंस पर टेक्निकल मेंटेनेंस, स्टाफ ट्रेनिंग, और ओपन डेटा रिपोर्टिंग में सुधार लाने का दबाव बनेगा। यह दीर्घकालीन रूप से भारत की एविएशन सेवाओं को अधिक सुरक्षित बना सकता है।

सरकार और डीजीसीए की भूमिका

इस हादसे के बाद DGCA (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) ने भी संबंधित एयरलाइनों को विस्तृत सुरक्षा ऑडिट और जांच के निर्देश दिए हैं। सरकार ने यात्रियों को भरोसा दिलाने की कोशिश की है कि भारतीय आसमान अब भी दुनिया के सबसे सुरक्षित हवाई क्षेत्रों में से एक है।

लेकिन यात्रियों के बीच भरोसे की बहाली अब केवल सरकारी बयान नहीं, बल्कि एयरलाइंस की पारदर्शिता और वास्तविक सुधारों पर निर्भर करेगी।

क्या जांच रहे हैं यात्री?

वर्तमान में फ्लाइट टिकट बुक करते समय यात्री निम्नलिखित बातों पर विशेष ध्यान दे रहे हैं:

  • एयरलाइन की सुरक्षा रैंकिंग (जैसे Skytrax या AirlineRatings.com से)

  • विमान मॉडल और उसका निर्माण वर्ष

  • पिछली इमरजेंसी लैंडिंग या दुर्घटना का रिकॉर्ड

  • पायलट ट्रेनिंग और स्टाफ अनुभव

  • DGCA द्वारा जारी सेफ्टी ऑडिट रिपोर्ट्स

यात्रा से पहले अब कई यात्री यूट्यूब पर एयरलाइन समीक्षा वीडियो देखते हैं और फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट्स पर विमानों की टेक्निकल स्थिति चेक करते हैं।

मनोवैज्ञानिक प्रभाव

विशेषज्ञ बताते हैं कि फ्लाइट क्रैश जैसी घटनाएं यात्रियों में फ्लाइंग फोबिया (aviophobia) को बढ़ा सकती हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि एयरलाइंस यात्रियों को सही और समय पर जानकारी दें, जिससे वे आत्मविश्वास के साथ यात्रा कर सकें।

कुछ एयरलाइंस ने तो अब अपने कस्टमर केयर पोर्टल्स में एक “सेफ्टी स्टैटिस्टिक्स सेक्शन” जोड़ने की योजना बनाई है, जहां यात्री खुलकर जानकारी प्राप्त कर सकें।

 

Awaz Mazha
Author: Awaz Mazha

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