महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में रविवार शाम एक दर्दनाक हादसे में 60 वर्षीय साइकिल सवार प्रभाकर गणपत क्षीरसागर की करंट लगने से मौत हो गई। प्रभाकर, जो जनता महाविद्यालय में संविदा पर सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्यरत थे, शाम करीब 6:30 बजे साइकिल से अपने घर की ओर लौट रहे थे। इस दौरान ऑल इंडिया रेडियो से जगन्नाथ बाबा नगर के रास्ते में सड़क पर गिरे एक 11 केवी के हाई-वोल्टेज तार की चपेट में आ गए।
यह तार बिजली के पोल (नंबर A-65) से दोपहर करीब 4:30 बजे टूट कर गिरा था। स्थानीय नागरिकों ने तत्काल MSEDCL (महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड) को इसकी सूचना दी और 4:59 बजे शिकायत दर्ज कराई। परंतु, विभाग द्वारा को

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त्वरित कार्रवाई नहीं की गई।
प्रभाकर की साइकिल का पहिया उस गिरे हुए तार में उलझ गया, जिससे वे नीचे गिर गए और करंट की चपेट में आकर मौके पर ही उनकी मौत हो गई। दुखद यह कि शाम 6:00 बजे शिकायतकर्ता को MSEDCL की ओर से एक स्वचालित संदेश मिला, जिसमें कहा गया था कि समस्या का समाधान हो गया है, जबकि तार अभी भी सड़क पर पड़ा हुआ था और जीवित था।
घटना के बाद पूर्व नगरसेवक और जनविकास सेना के प्रमुख पप्पू देशमुख मौके पर पहुंचे और उन्होंने पुलिस तथा बिजली विभाग के अधिकारियों को बुलाया। गुस्साए नागरिकों ने जब तक मृतक के परिवार को मुआवजे का लिखित आश्वासन नहीं मिला, तब
तक शव को हटाने से मना कर दिया। अंततः सहायक अभियंता कुणाल पाटिल द्वारा लिखित आश्वासन देने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
देशमुख ने इसे ‘घोर लापरवाही’ करार दिया और MSEDCL के अधिकारियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह मार्ग हजारों नागरिकों और स्कूली बच्चों द्वारा प्रतिदिन उपयोग में लाया जाता है, और इतने खतरनाक स्थिति में तार को 90 मिनट से अधिक समय तक जीवित अवस्था में छोड़ देना सीधे तौर पर आपराधिक लापरवाही है। उन्होंने मृतक के परिवार को ₹1 करोड़ के मुआवजे की भी मांग की है।
चंद्रपुर में यह पहली घटना नहीं है। पिछले एक वर्ष में यहां अवैध इलेक्ट्रिक फेंसिंग और बिजली विभाग की लापरवाही से 13 लोगों की जान जा चुकी है। इनमें चार किसान शामिल हैं जो खुद अपने खेतों की रक्षा के लिए फेंसिंग कर रहे थे। सितंबर 2024 में गणेशपुर गांव में एक ही परिवार के चार लोगों की करंट लगने से मौत हो गई थी, जो खेत में बिजली की तार बिछा रहे थे।
प्रभाकर क्षीरसागर की मौत ने एक बार फिर साबित किया है कि बिजली से संबंधित सुरक्षा को लेकर जागरूकता और जवाबदेही दोनों की भारी कमी है। यह घटना प्रशासन और बिजली विभाग के लिए एक चेतावनी है कि यदि अब भी सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसे हादसे रुकने की बजाय बढ़ते ही जाएंगे।







