*नई दिल्ली, 7 मई 2025* – भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है, जिसके चलते जम्मू-कश्मीर, पंजाब और उत्तरी भारत के कई राज्यों में स्कूल, कॉलेज और शैक्षणिक संस्थानों को बंद कर दिया गया है। यह कदम भारत द्वारा 7 मई 2025 को पाकिस्तान और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर पर किए गए हवाई हमलों के बाद उठाया गया है, जो पिछले महीने पहलगाम में हुए घातक आतंकी हमले का जवाब है। इस हमले में 26 लोगों की जा
न गई थी। बढ़ते तनाव ने न केवल रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित किया है, बल्कि दोनों परमाणु-संपन्न पड़ोसियों के बीच बड़े सैन्य टकराव की आशंका को भी बढ़ा दिया है।
#### पहलगाम हमला: एक दुखद शुरुआत
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में स्थित पहलगाम के बाइसरण मीडो में एक भयानक आतंकी हमला हुआ। इस हमले में आतंकवादियों ने पर्यटकों पर अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें 26 लोग मारे गए, जिनमें से ज्यादातर पर्यटक थे, और कई अन्य घायल हो गए। यह हाल के वर्षों में नागरिकों पर सबसे घातक हमलों में से एक था, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया। 24 अप्रैल को बिहार में एक रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “इस आतंकी हमले के जिम्मेदार लोगों और उनके साजिशकर्ताओं को ऐसी सजा दी जाएगी, जो उनकी कल्पना से भी परे होगी।”
भारत ने हमेशा से पाकिस्तान पर क्षेत्र में आतंकवाद को समर्थन देने का आरोप लगाया है, जिसे पाकिस्तान लगातार खारिज करता रहा है। हमले के बाद तनाव बढ़ गया, और भारत ने पाकिस्तान के साथ राजनयिक संबंधों को और कम कर दिया। केंद्र सरकार ने सिंधु जल संधि को निलंबित करने की घोषणा की, जिसे पाकिस्तान ने “युद्ध की कार्रवाई” करार दिया। इस बीच, पंजाब और उत्तराखंड जैसे राज्यों में कश्मीरी छात्रों ने उत्पीड़न की शिकायतें कीं। कुछ छात्रों को हॉस्टल और अपार्टमेंट से निकाल दिया गया, जिसके बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अन्य राज्यों के नेताओं से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
#### ऑपरेशन सिंदूर: भारत का जवाबी हमला
स्थिति तब और गंभीर हो गई, जब 6 मई 2025 की रात को भारत ने “ऑपरेशन सिंदूर” नामक सैन्य अभियान शुरू किया। भारतीय सेना के अनुसार, इस अभियान में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिसमें कोटली, बहावलपुर और मुजफ्फराबाद जैसे स्थान शामिल थे। सरकार के सूत्रों ने दावा किया कि इस अभियान में 75 आतंकवादी मारे गए और 55 अन्य घायल हुए।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस अभियान की सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, “भारत माता की जय।” हालांकि, पाकिस्तान ने इन हवाई हमलों की निंदा करते हुए इसे “बिना उकसावे और युद्ध का स्पष्ट कृत्य” करार दिया। पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा कि हमलों में मुरिदके और बहावलपुर में नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाया गया, साथ ही नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पार भी हमले किए गए। पाकिस्तान की सेना ने दावा किया कि हमलों में सात लोग मारे गए, जिनमें दो बच्चे भी शामिल थे, और उसने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी।
भारतीय वायुसेना ने भारतीय हवाई क्षेत्र में रहते हुए स्टैंडऑफ हथियारों का उपयोग करके ये हमले किए। पाकिस्तान ने दावा किया कि उसने पांच भारतीय वायुसेना के जेट और एक ड्रोन को मार गिराया, हालांकि भारत ने इन नुकसानों की पुष्टि नहीं की। ऑपरेशन का नाम “सिंदूर” इसलिए रखा गया, क्योंकि पहलगाम हमले में केवल पुरुषों को निशाना बनाया गया था और महिलाओं को छोड़ दिया गया था। यह नाम हिंदू परंपरा में सुहाग का प्रतीक है, जो महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी उम्र के लिए लगाया जाता है।
#### स्कूल-कॉलेज बंद: तत्काल प्रभाव
बढ़ते तनाव के जवाब में भारत में अधिकारियों ने स्कूल, कॉलेज और शैक्षणिक संस्थानों को बंद करने की घोषणा की। जम्मू-कश्मीर में जम्मू, सांबा, कठुआ, राजौरी और पुंछ जैसे क्षेत्र प्रभावित हुए। जम्मू के संभागीय आयुक्त ने “वर्तमान स्थिति” को देखते हुए यह फैसला लिया। जम्मू विश्वविद्यालय, कश्मीर विश्वविद्यालय और क्लस्टर विश्वविद्यालय श्रीनगर ने सप्ताह भर के लिए सभी परीक्षाओं को स्थगित कर दिया, और नई तारीखों की घोषणा बाद में की जाएगी।
यह बंदी जम्मू-कश्मीर से आगे बढ़ी। पंजाब में अमृतसर जैसे सीमावर्ती जिलों में स्कूल बंद कर दिए गए, और राज्य सरकार ने आपातकाल की स्थिति घोषित कर दी। अस्पतालों और सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया। पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने अटारी-वाघा सीमा के पास सतर्कता बढ़ाने पर जोर दिया, जहां तनाव स्पष्ट रूप से महसूस किया जा रहा है। राजस्थान और हिमाचल प्रदेश जैसे अन्य उत्तरी राज्यों में भी सीमावर्ती क्षेत्रों में स्कूल बंद किए गए, जो इस संघर्ष की गंभीरता को दर्शाता है।
यह कदम भारत-पाकिस्तान के पिछले संघर्षों की याद दिलाता है। 2019 में पुलवामा हमले और उसके बाद हुए हवाई हमलों के बाद राजौरी और पुंछ में नियंत्रण रेखा से 5 किलोमीटर के दायरे में स्कूल बंद कर दिए गए थे, और परीक्षाएं स्थगित कर दी गई थीं। हालांकि, इस बार बंदी का दायरा कहीं अधिक व्यापक है, जो स्थिति की गंभीरता और भौगोलिक प्रभाव को दर्शाता है।
#### रोजमर्रा की जिंदगी पर असर: हवाई क्षेत्र बंद और यात्रा में रुकावट
हवाई हमलों ने हवाई यात्रा और दोनों देशों के बीच व्यापार को भी प्रभावित किया है। पाकिस्तान ने लाहौर और कराची जैसे प्रमुख शहरों के आसपास अपने हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया, जिसके कारण कई उड़ानें डायवर्ट की गईं। भारतीय एयरलाइंस जैसे इंडिगो, स्पाइसजेट और एयर इंडिया ने जम्मू, श्रीनगर, अमृतसर, लेह और चंडीगढ़ जैसे उत्तरी शहरों से उड़ानों को रद्द करने और डायवर्ट करने की सूचना दी। इंडिगो ने “बदलती हवाई क्षेत्र की स्थितियों” को इसका कारण बताया, जबकि स्पाइसजेट ने कहा कि उत्तरी भारत के कई हवाई अड्डे “आगे की सूचना तक” बंद हैं।
अटारी-वाघा सीमा पर बढ़ते तनाव का प्रभाव स्पष्ट है। पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान ने व्यापार निलंबित कर दिया और ज्यादातर भारतीयों के वीजा रद्द कर दिए। यह सीमा, जो दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण रिश्तों का प्रतीक है, अब इस संघर्ष की मानवीय कीमत को दर्शाती है, जहां पीड़ा और अनिश्चितता हावी है।
#### वैश्विक प्रतिक्रियाएं और कूटनीतिक प्रयास
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने बढ़ते तनाव पर चिंता जताई है। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि वे स्थिति पर “नजदीकी नजर” रख रहे हैं। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने रुबियो को सैन्य अभियान की जानकारी दी, और आतंकवाद के खिलाफ भारत की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। अरब लीग, साथ ही कतर, जॉर्डन और इराक जैसे देशों ने पहलगाम हमले की निंदा की और भारत के साथ एकजुटता व्यक्त की, साथ ही तनाव कम करने की अपील की।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने दोनों पक्षों के लिए स्वीकार्य “तनाव कम करने” और “संवाद शुरू करने” के लिए समर्थन की पेशकश की। हालांकि, पाकिस्तान के इस दावे ने कि पहलगाम हमला भारत द्वारा रचा गया “झूठा ऑपरेशन” था, कूटनीतिक प्रयासों को जटिल बना दिया। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने घोषणा की कि पाकिस्तान हवाई हमलों का जवाब देगा, जिससे व्यापक सैन्य टकराव की आशंका बढ़ गई।
#### जमीनी हकीकत: मानवीय संकट
संघर्ष का मानवीय प्रभाव स्पष्ट हो रहा है। कश्मीर में, पर्यटकों के लिए खतरे को देखते हुए लगभग 50 सार्वजनिक पार्क और उद्यान बंद कर दिए गए हैं। भारत भर में कश्मीरी छात्रों को उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें जलंधर और देहरादून जैसे शहरों में इस्लामोफोबिक टिप्पणियां और बेदखली की घटनाएं शामिल हैं। जलंधर में एक कश्मीरी छात्र आसिफ डार ने बताया, “सभी की नजरें मुझ पर थीं, और वे दोस्ताना नहीं थीं।”
पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में, मुजफ्फराबाद में आपातकालीन सेवा कर्मचारी स्कूली बच्चों को प्राथमिक चिकित्सा और निकासी की प्रक्रिया सिखा रहे हैं, ताकि आगे के हमलों की स्थिति में वे तैयार रहें। दोनों ओर डर का माहौल है, और परिवार सबसे बुरे की तैयारी कर रहे हैं। ह्यूस्टन में रहने वाले एक कश्मीरी पंडित अमित रैना ने पहलगाम हमले को “बार-बार आने वाला दुःस्वप्न” बताया, जो दशकों से चले आ रहे संघर्ष के गहरे निशानों को दर्शाता है।
#### ऐतिहासिक संदर्भ: दशकों पुराना संघर्ष
वर्तमान संकट 1947 से चले आ रहे संघर्ष का नवीनतम अध्याय है, जब ब्रिटिश भारत का विभाजन हुआ और भारत व पाकिस्तान का निर्माण हुआ। जम्मू-कश्मीर की रियासत एक विवाद का केंद्र बन गई, जिसमें दोनों देशों ने इस क्षेत्र पर पूरा दावा किया, लेकिन इसे हिस्सों में शासित किया। भारत सबसे बड़ा हिस्सा नियंत्रित करता है, जबकि पाकिस्तान आजाद कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान पर शासन करता है। चीन भी अक्साई चिन नामक एक छोटे क्षेत्र पर कब्जा करता है, जिससे विवाद और जटिल हो जाता है।
दशकों से इस क्षेत्र में कई युद्ध, विद्रोह और आतंकी हमले देखे गए हैं। 1989 में भारतीय प्रशासित कश्मीर में स्वतंत्रता समर्थक विद्रोह शुरू हुआ, जिसे कथित तौर पर पाकिस्तान ने समर्थन दिया, जिससे तनाव बढ़ा। 1999 का कारगिल युद्ध दोनों देशों को पूर्ण पैमाने पर संघर्ष के कगार पर ले आया। 2019 के पुलवामा हमले, जिसमें 40 सीआरपीएफ कर्मी मारे गए थे, के बाद भारत ने पाकिस्तान के बालाकोट में हवाई हमले किए, और इसके बाद पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई की, जो 1971 के बाद दोनों देशों के बीच पहला हवाई युद्ध था।
2019 में भारत द्वारा जम्मू-कश्मीर की अर्ध-स्वायत्त स्थिति को रद्द करने से संबंध और बिगड़ गए, जिसे पाकिस्तान ने उकसावे की कार्रवाई माना। पहलगाम हमला और उसके बाद के हवाई हमले अब व्यापक संघर्ष की आशंकाओं को फिर से जगा रहे हैं, क्योंकि दोनों देशों ने नियंत्रण रेखा पर भारी सैन्य तैनाती की है।
#### राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: एकता और विभाजन
भारत में, राजनीतिक नेताओं ने बड़े पैमाने पर पहलगाम हमले की निंदा की और सरकार के जवाब का समर्थन किया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, जिन्होंने अनंतनाग में घायलों से मुलाकात की, ने कड़ी कार्रवाई की मांग की और कहा, “जिम्मेदार लोगों को कीमत चुकानी होगी।” शिव सेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने हमले पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की, जबकि कांग्रेस राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में प्रधानमंत्री मोदी को अपनी पार्टी के समर्थन का आश्वासन दिया।
हालांकि, आलोचनाएं भी सामने आईं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने बीजेपी पर स्थिति को गलत तरीके से संभालने का आरोप लगाया और कहा, “वे यह तय नहीं कर पा रहे कि असली निशाना कौन है।” इस बीच, जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जोर दिया कि क्षेत्र के लोग दुश्मन नहीं हैं, और राष्ट्र से आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने की अपील की, न कि कश्मीरी नागरिकों को निशाना बनाने की।
#### भविष्य की राह: अनिश्चितता का साया
7 मई 2025 तक, स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है, और भारत व पाकिस्तान दोनों हाई अलर्ट पर हैं। भारतीय वायुसेना ने नियंत्रण रेखा के पास दो दिनों के लिए हवाई अभ्यास की योजना बनाई है, जिसमें राफेल, मिराज 2000 और सुखोई-30 जैसे विमान शामिल होंगे। यह अभ्यास जमीनी हमलों और हवा से हवा में युद्ध की तैयारी के लिए है, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।
दोनों देशों के बीच संवाद की कमी और बढ़ती सैन्य गतिविधियां एक बड़े टकराव की आशंका को बढ़ा रही हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की मध्यस्थता की पेशकश के बावजूद, दोनों पक्षों के सख्त रुख ने शांति की संभावनाओं को कम कर दिया है। भारत और पाकिस्तान के बीच यह तनाव न केवल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा है, बल्कि लाखों लोगों की जिंदगी को भी प्रभावित कर रहा है, जो अनिश्चितता और डर के साए में जी रहे हैं।
इस संकट का समाधान निकट भविष्य में आसान नहीं दिखता, और यह दोनों देशों के नेतृत्व के साथ-साथ वैश्विक समुदाय की जिम्मेदारी है कि वे इस तनाव को कम करने के लिए ठोस कदम उठाएं, ताकि और अधिक मानवीय नुकसान को रोका जा सके।







