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भारत की जवाबी रणनीति पर बोले अमेरिकी पूर्व अधिकारी: “शुरुआत तो पाकिस्तान ने की थी।

भारत-पाकिस्तान तनाव पर अमेरिकी पूर्व अधिकारी की टिप्पणी: क्या भारत अब निर्णायक जवाब देगा?

भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों पुराना तनाव किसी से छिपा नहीं है। लेकिन हाल ही में, इस मुद्दे पर अमेरिका के एक पूर्व रक्षा मंत्रालय अधिकारी की टिप्पणी ने नई हलचल पैदा कर दी है। उन्होंने कहा, “इस पूरे विवाद की शुरुआत तो पाकिस्तान ने की थी, अब भारत की प्रतिक्रिया निर्णायक हो सकती है।” इस बयान ने न केवल राजनैतिक गलियारों में बल्कि आम जनता के बीच भी चर्चा को जन्म दिया है।

इस बयान का समय भी खास है क्योंकि हाल ही में सीमा पर फिर से कुछ तनावपूर्ण घटनाएं सामने आई हैं। एलओसी (लाइन ऑफ कंट्रोल) पर लगातार हो रही गोलीबारी और आतंकियों की घुसपैठ की कोशिशों ने एक बार फिर भारत को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया

सीजफायर का

 है।

🛡️ क्या कहा अमेरिकी अधिकारी ने?

पूर्व अमेरिकी रक्षा मंत्रालय अधिकारी, जिन्होंने लंबे समय तक दक्षिण एशियाई मामलों पर काम किया है, ने एक साक्षात्कार में कहा:

“जब हम भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव की बात करते हैं, तो हमें इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को समझना होगा। इस बार की शुरुआत पाकिस्तान की तरफ से हुई। भारत अब यह महसूस कर रहा है कि उसे रक्षात्मक नहीं, बल्कि सक्रिय नीति अपनानी चाहिए।”

यह बयान उस सोच को दर्शाता है जो अब वैश्विक मंच पर भारत के प्रति बदल रही है। अब भारत को केवल ‘प्रतिक्रिया देने वाला देश’ नहीं, बल्कि ‘रणनीतिक रूप से सक्रिय राष्ट्र’ के तौर पर देखा जा रहा है।

🔍 पाकिस्तान की ‘शुरुआत’ का मतलब क्या है?

जब अधिकारी कहते हैं कि “शुरुआत पाकिस्तान ने की”, तो उनका इशारा सीमा पार से हो रही गतिविधियों की ओर होता है — जैसे:

  • आतंकियों की घुसपैठ

  •  उल्लंघन

  • जम्मू-कश्मीर में अस्थिरता फैलाने की कोशिशें

ये सभी घटनाएं पाकिस्तान की ओर से निरंतर होती रही हैं, जिनके जवाब में भारत ने कई बार संयम दिखाया है। लेकिन अब माहौल बदलता दिख रहा है।

🇮🇳 भारत की नई रणनीति: अब चुप्पी नहीं, करारा जवाब

पिछले कुछ वर्षों में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ कठोर कदम उठाए हैं। उरी हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक और पुलवामा के बाद बालाकोट एयरस्ट्राइक ने यह साफ कर दिया था कि भारत अब अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए हरसंभव उपाय करने को तैयार है।

अब जब एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी इस बात को खुले तौर पर स्वीकार कर रहे हैं कि उकसाने की शुरुआत पाकिस्तान ने की थी, तो यह भारत की नीतियों के लिए एक कूटनीतिक समर्थन जैसा है।

🌍 अंतरराष्ट्रीय नजरिया: भारत के पक्ष में झुकाव

पिछले कुछ समय में अमेरिका, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और कई अन्य देशों ने भारत की आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाईयों का समर्थन किया है। अमेरिका के पूर्व रक्षा अधिकारी का यह बयान उसी बढ़ते अंतरराष्ट्रीय समर्थन का प्रतीक है।

उन्होंने आगे कहा:

“भारत को अब अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए स्पष्ट और निर्णायक नीति अपनानी चाहिए। समय आ गया है कि वह केवल प्रतिक्रिया न दे, बल्कि भविष्य में होने वाले खतरों को पहले से रोकने की रणनीति अपनाए।”

🧭 क्या यह बयान भारत की विदेश नीति को प्रभावित करेगा?

भारत की विदेश नीति पहले ही काफी हद तक सशक्त और

 संतुलित रही है। लेकिन इस तरह के अंतरराष्ट्रीय बयान भारत को और मजबूती प्रदान करते हैं — खासकर वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान को बेनकाब करने में।

भारत अब एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहा है जो न सिर्फ अपने हितों की रक्षा करना जानता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय शांति और स्थिरता में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

🗣️ जनता की प्रतिक्रिया: “अब और नहीं”

सोशल मीडिया पर आम जनता की प्रतिक्रियाएं काफी तीव्र रही हैं। कई यूजर्स ने इस बयान को भारत की नीति में बदलाव का समर्थन मानते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि पाकिस्तान को हर स्तर पर सख्त जवाब मिले — चाहे वह कूटनीतिक हो, सैन्य हो या आर्थिक।

📢 निष्कर्ष: क्या भारत अब निर्णायक मोड में है?

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के पूर्व अधिकारी की यह टिप्पणी केवल एक बयान नहीं, बल्कि भारत की रणनीतिक दिशा को अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति मिलने का संकेत है। भारत ने हमेशा शांति की वकालत की है, लेकिन अब जब सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं, तो जवाब भी उतना ही मजबूत और सटीक होगा।

अब देखना यह है कि आने वाले दिनों में भारत किस प्रकार की नीति अपनाता है। लेकिन इतना तय है कि अब न तो भारत चुप रहेगा, और न ही सीमाओं पर किसी भी हरकत को अनदेखा करेगा।

 

Awaz Mazha
Author: Awaz Mazha

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