सुप्रीम कोर्ट में वक्फ से जुड़ा बड़ा मामला: अब 20 मई को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में वक्फ से जुड़े एक अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई हो रही है, जो भारत के कानूनी, सामाजिक और धार्मिक परिदृश्य में व्यापक असर डाल सकता है। न्यायमूर्ति बी. आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले को आगामी 20 मई, 2025 को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
हालांकि इस पीठ में भारत के मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ उपस्थि
त नहीं थे, लेकिन गवई के नेतृत्व में मामले की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई, जिससे यह संकेत मिला कि अदालत इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है और शीघ्र समाधान की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
वक्फ विवाद क्या है?
वक्फ का अर्थ होता है ऐसी संपत्ति जिसे कोई व्यक्ति धार्मिक या सामाजिक कल्याण हेतु दान कर देता है। भारत में लाखों एकड़ भूमि वक्फ बोर्डों के अधीन आती है, जिसका संचालन मुस्लिम धर्म-संस्थाएं करती हैं। लेकिन समय-समय पर यह आरोप लगे हैं कि इन संपत्तियों का दुरुपयोग हो रहा है या ये संपत्तियाँ सरकारी योजनाओं के रास्ते में बाधा बन रही हैं।
वर्तमान मामला किस बारे में है?
मौजूदा मामला वक्फ संपत्तियों की वैधता, उनके प्रशासन और कानूनी दायरे को लेकर है। इसमें यह सवाल उठाया गया है कि क्या वक्फ बोर्डों को असीमित अधिकार दिए जा सकते हैं और क्या यह संविधान द्वारा प्रदत्त संपत्ति के अधिकारों का उल्लंघन करता है?
इसके अतिरिक्त, अदालत में यह भी बहस हो रही है कि वक्फ अधिनियम की कुछ धाराएं क्या संविधान की मूल भावना के अनुरूप हैं या नहीं। याचिकाकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया है कि वक्फ अधिनियम, 1995 की कुछ प्रावधानें धर्म के नाम पर भेदभाव करती हैं और इससे भारत में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) के रास्ते में रुकावट आती है।
पिछली सुनवाइयों का सारांश
इस मामले की शुरुआत 2023 में हुई थी, जब कुछ याचिकाकर्ताओं ने वक्फ अधिनियम को चुनौती दी थी। उनका कहना था कि यह अधिनियम विशेष रूप से एक धर्म के लिए विशेषाधिकार उत्पन्न करता है और यह भारतीय संविधान की मूल भावना—समानता और धर्मनिरपेक्षता—के खिलाफ है।
इसके बाद यह मामला धीरे-धीरे सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। अदालत ने कई बार इस पर गहन चर्चा की है और विभिन्न पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है। हाल ही में हुई सुनवाई में अदालत ने माना कि मामला संवैधानिक और सामाजिक दोनों ही दृष्टिकोण से अत्यंत गंभीर है।
20 मई को क्या हो सकता है?
20 मई की सुनवाई में अदालत सभी पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनेगी। इसमें यह स्पष्ट हो सकता है कि:
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क्या वक्फ अधिनियम की कुछ धाराएं संविधान के विरुद्ध हैं?
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क्या वक्फ बोर्डों को संपत्ति पर नियंत्रण का असीम अधिकार दिया जा सकता है?
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क्या यह मामला समान नागरिक सं
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हिता पर असर डालेगा?
सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव
यह मामला केवल एक कानूनी बहस नहीं है। इसके दूरगामी प्रभाव सामाजिक ताने-बाने और धार्मिक संगठनों पर भी होंगे। वक्फ संपत्तियों पर लंबे समय से कई समुदायों और संस्थाओं के बीच विवाद चलता आ रहा है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय इस दिशा में स्पष्टता ला सकता है।
साथ ही, वर्तमान राजनीतिक माहौल में, जहाँ समान नागरिक संहिता को लेकर चर्चा तेज है, यह मामला और भी अहम हो जाता है। यह निर्णय आने वाले समय में देश की नीतियों को प्रभावित कर सकता है।








