जब बात देश के हित की हो, तो मैं कभी पीछे नहीं रहूंगा”: शशि थरूर का राष्ट्रभक्ति से भरा संदेश, सरकार के फैसले का किया स्वागत
भारतीय राजनीति में जहाँ आमतौर पर दलगत राजनीति और वैचारिक मतभेद सुर्खियाँ बटोरते हैं, वहीं कुछ ऐसे भी क्षण आते हैं जब राष्ट्रहित सब कुछ पीछे छोड़ देता है। ऐसा ही एक उदाहरण हाल ही में देखने को मिला, जब कांग्रेस नेता और सांसद डॉ. शशि थरूर ने सरकार द्वारा उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय डेलिगेशन में शामिल किए जाने पर आभार व्यक्त किया।
थरूर ने ट्वीट करते हुए लिखा:
“जब बात भारत के राष्ट्रीय हित की हो, तो मैं कभी पीछे नहीं हटूंगा। सरकार का आभार कि उन्होंने मुझे इस डेलिगेशन का हिस्सा बनाया।”
यह बयान न केवल उनके व्यक्तिगत दृष्टिकोण को दर्शाता है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र में परिपक्वता और समन्वय की मिसाल भी पेश करता है।
🇮🇳 डेलिगेशन में शशि थरूर की भूमिका
सरकार द्वारा गठित यह डेलिगेशन किसी अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की नीतियों, संस्कृति और दृष्टिकोण को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने के उद्देश्य से भेजा जा रहा है। इस डेलिगेशन में सत्तारूढ़ दल के साथ-साथ विपक्षी दलों के नेताओं को भी आमंत्रित किया गया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि इस प्रयास में राष्ट्र के हित को सर्वोपरि रखा गया है।
शशि थरूर की इस प्रतिनिधिमंडल में उपस्थिति विशेष रूप से इसलिए महत्व
पूर्ण है क्योंकि वे एक अनुभवी राजनयिक, लेखक और विदेश मामलों के जानकार हैं। संयुक्त राष्ट्र में अपने लंबे कार्यकाल और विदेश मामलों की संसदीय समिति में अनुभव के चलते थरूर न केवल भारत की छवि को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर सकते हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया और राजनीतिक नेतृत्व के साथ सार्थक संवाद भी स्थापित कर सकते हैं।
राजनीति से ऊपर उठने का संदेश
थरूर का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत में लोकसभा चुनाव का माहौल गर्म है और विभिन्न राजनीतिक दल एक-दूसरे पर तीखे हमले कर रहे हैं। इस माहौल में जब एक वरिष्ठ विपक्षी नेता यह कहता है कि राष्ट्रहित के लिए वह हर संभव सहयोग को तैयार है, तो यह एक सकारात्मक और प्रेरणादायक संदेश बन जाता है।
यह कहना गलत नहीं होगा कि थरूर ने ‘पार्टी पहले नहीं, देश पहले’ की भावना को व्यवहार में उतारा है।
सरकार और विपक्ष का सहयोग—एक नई शुरुआत?
शशि थरूर द्वारा सरकार के इस कदम की सराहना करना केवल एक औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं है। यह दिखाता है कि जब बात देश की वैश्विक छवि को लेकर होती है, तब राजनीतिक सहयोग भी संभव है।
ऐसे सहयोग से निम्नलिखित लाभ हो सकते हैं:
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की आवाज़ और अधिक संतुलित और भरोसेमंद बन सकती है।
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वैश्विक मंचों पर भारत की विविधता और लोकतांत्रिक ताकत को दर्शाने में मदद मिलती है।
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विपक्ष को भी देश के मामलों में सीधा योगदान देने का अवसर मिलता है।
शशि थरूर का अनुभव और प्रभाव
थरूर का राजनयिक और बौद्धिक अनुभव भारतीय प्रतिनिधिमंडल के लिए एक महत्वपूर्ण संपत्ति है। वे न केवल अंग्रेज़ी में धाराप्रवाह वक्ता हैं, बल्कि वे अंतरराष्ट्रीय मीडिया, राजनीतिक विश्लेषकों और नेताओं के बीच एक विश्वसनीय और विद्वान चेहरा हैं।
उनकी उपस्थिति भार
त के विचारों को तार्किक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संदर्भों में पेश करने में मदद करेगी। यही कारण है कि सरकार द्वारा उन्हें प्रतिनिधिमंडल में शामिल करना एक रणनीतिक रूप से समझदारी भरा निर्णय कहा जा सकता है।
व्यापक संदेश क्या है?
शशि थरूर का यह रुख उन सभी राजनीतिक नेताओं के लिए एक प्रेरणा है जो अक्सर छोटी राजनीतिक लड़ाइयों में उलझे रहते हैं। यह संदेश देता है कि जब देश की बात हो, तब राजनीति की दीवारें गिर जानी चाहिए।
इस घटना का राजनीतिक और सामाजिक रूप से एक बड़ा प्रभाव है:
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यह दर्शाता है कि भारतीय लोकतंत्र में अभी भी परिपक्वता है।
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यह युवाओं को राजनीति के सकारात्मक पहलुओं से जोड़ सकता है।
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यह वैश्विक स्तर पर भारत की एकता और विविधता को दर्शाता है।








