Best News Portal Development Company In India

‘वन वर्ल्ड फॉर हेल्थ’ पर भारत का वैश्विक दृष्टिकोण

PM नरेंद्र मोदी का जिनेवा से दुनिया को स्वास्थ्य का संदेश: “वन वर्ल्ड फॉर हेल्थ” की अवधारणा पर भारत का मार्गदर्शन

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की वार्षिक महासभा में इस वर्ष जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिनेवा पहुंचे, तो पूरा विश्व उनके भाषण की ओर देख रहा था। वर्तमान वैश्विक स्वास्थ्य संकट, महामारी के बाद के दौर और हेल्थकेयर में नवाचारों की होड़ के बीच उनका “One World for Health” (एक विश्व, एक स्वास्थ्य) थीम पर दिया गया संबोधन न केवल सामयिक था बल्कि दृष्टिकोण के स्तर पर बहुत दूरगामी सिद्ध हुआ।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में जिस

 

 तरह से भारत की पारंपरिक और आधुनिक स्वास्थ्य नीतियों का संतुलन प्रस्तुत किया, वह विश्व के कई विकसित देशों के लिए भी अनुकरणीय बन सकता है।

भारत की सोच: ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ से ‘वन वर्ल्ड फॉर हेल्थ’ तक

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण की शुरु

आत भारत की सनातन अवधारणा “सर्वे भवन्तु सुखिनः” से की — अर्थात सभी सुखी हों। यह विचार न केवल भारत के सामाजिक जीवन का हिस्सा है, बल्कि इसकी नीतियों और वैश्विक पहल में भी रचा-बसा है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि “स्वास्थ्य अब केवल एक देश का विषय नहीं रहा, यह वैश्विक जिम्मेदारी बन गया है। इसलिए हमारा दृष्टिकोण होना चाहिए — वन अर्थ, वन हेल्थ।”

आयुष और योग का वैश्विक महत्व

PM मोदी ने कहा कि भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली — जैसे आयुर्वेद, योग और यूनानी — आज दुनिया में भरोसे का प्रतीक बन चुकी हैं। उन्होंने बताया कि आयुष मंत्रालय के माध्यम से भारत ने वैश्विक स्तर पर प्राकृतिक चिकित्सा को बढ़ावा दिया है। WHO की सहमति से भारत में बना ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रैडिशनल मेडिसिन (गुजरात के जामनगर में) इसका सशक्त प्रमाण है।

उन्होंने कहा, “योग और प्राचीन चिकित्सा विज्ञान अब केवल भारत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका लाभ अब अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका तक पहुँच रहा है।”

डिजिटल हेल्थ मिशन: टेक्नोलॉजी के साथ स्वास्थ्य सेवा

अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने “आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन” की चर्चा भी की, जो स्वास्थ्य सेवा को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने वाला भारत का सबसे बड़ा प्रयास है। उन्होंने बताया कि इस मिशन के तहत प्रत्येक नागरिक को यूनिक हेल्थ आईडी दी जा रही है, जिससे उनकी मेडिकल हिस्ट्री, जांच रिपोर्ट्स और उपचार की जानकारी डिजिटल रूप से उपलब्ध हो।

यह प्रणाली न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को पा

रदर्शी बनाती है बल्कि उपचार को भी अधिक सुलभ और किफायती बनाती है।

भारत की महामारी से लड़ने की क्षमता: एक प्रेरणा

कोविड-19 महामारी के समय भारत ने जिस तरह से टीकाकरण अभियान चलाया, मास्क और पीपीई किट का उत्पादन किया, वह आज भी एक केस स्टडी है। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि भारत ने न केवल अपने नागरिकों को सुरक्षित किया बल्कि 100 से

अधिक देशों को वैक्सीन सहायता (Vaccine Maitri) के तहत मदद भी भेजी।

उन्होंने कहा, “हमारे लिए दुनिया एक परिवार है — यही हमारी वैक्सीन नीति में भी झलकता है।”

ग्लोबल हेल्थ इनिशिएटिव्स में भारत की भूमिका

PM मोदी ने WHO को सुझाव दिया कि एक वैश्विक आपदा स्वास्थ्य प्रतिक्रिया प्रणाली विकसित की जानी चाहिए, जिसमें सभी देशों की साझेदारी हो। भारत इस दिशा में अपना नेतृत्व देने को तैयार है। उन्होंने “हेल्थ फॉर ऑल” को एक वैश्विक आंदोलन के रूप में स्वीकार करने की भी बात की।

उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक फार्मा कंपनियों को अब विकासशील देशों में उत्पादन केंद्र बनाकर वहां की स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार सस्ती दवाएं उपलब्ध करानी चाहिए।

अफ्रीका और ग्लोबल साउथ को साथ लेकर चलने की अपील

अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने अफ्रीका और अन्य विकासशील देशों की स्वास्थ्य चुनौतियों की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत उन्हें मेडिकल उपकरण, दवाइयां, तकनीकी सहायता और प्रशिक्षित मानव संसाधन प्रदान करने को तैयार है।

भारत ने पहले ही कई अफ्रीकी देशों को टेलीमेडिसिन की सुविधा दी है और उन्हें स्वास्थ्य के डिजिटल भविष्य से जोड़ने की दिशा में काम कर रहा है।

जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य

एक महत्वपूर्ण मोड़ पर प्रधानमंत्री मोदी ने जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य के आपसी संबंधों की ओर ध्यान खींचा। उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण, जल संकट और अनियमित मौसम ने कई नई बीमारियों को जन्म दिया है।

भारत ‘LiFE’ मिशन (Lifestyle for Environment) के तहत स्वास्थ्य और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने का प्रयास कर रहा है।

 

Awaz Mazha
Author: Awaz Mazha

Share this post:

खबरें और भी हैं...

लाइव टीवी

लाइव क्रिकट स्कोर

चांदी सोने की कीमत

Weather Data Source: Wetter Indien 7 tage

Quick Link