कल्याण में फिर एक बार मानव लापरवाही और प्रशासनिक ढिलाई की भयानक कीमत चुकानी पड़ी। ठाणे जिले के कल्याण शहर में सोमवार की सुबह का सूरज एक भयानक खबर लेकर आया, जब दुर्गाड़ी क्षेत्र में स्थित एक पुरानी चार मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। इस दर्दनाक हादसे में छह लोगों की जान चली गई, जिनमें एक मासूम बच्चा और चार महिलाएं शामिल हैं।
घटना की जानकारी
सुबह करीब 10:30 बजे के आसपास यह हादसा हुआ जब लोग अपने रोजमर्रा के कामों में व्यस्त थे। बताया जा रहा है कि इस इमारत की हालत पहले से ही खस्ता थी और इसे खतरनाक घोषित किया गया था। लेकिन स्थानीय प्रशासन और निवासी किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुँच सके, नतीजा यह हुआ कि इस दुर्भाग्यपूर्ण दिन छह मासूम जिंदगियाँ मलबे के नीचे दफन हो गईं।
मरने वालों की पहचान
प्रशासन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार मरने वालों में निम्नलिखित लोग शामिल हैं:
-
सीमा यादव (32 वर्ष)
-
अंकिता यादव (8 वर्ष)
-
ज्योति शेख (28 वर्ष)
-
रेशमा खान (41 वर्ष)
-
राधा पाटिल (65 वर्ष)
-
मुकेश साहू (30 वर्ष)
इनमें से अधिकतर महिलाएं घर के काम में लगी थीं जबकि आठ वर्षीय अंकिता गर्मी की छुट्टियों के चलते घर पर ही थी।
रेस्क्यू ऑपरेशन: मौत के मलबे से जूझते NDRF जवान
घटना के तुरंत बाद NDRF (राष्ट्रीय आपदा मोचन बल), फायर ब्रिगेड और स्थानीय पुलिस टीम मौके पर पहुंचीं। करीब 6 घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद मलबे से छह शव निकाले गए। कुछ लोगों को घायल अवस्था में निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।
NDRF के एक अधिकारी ने बताया:
“यह इमारत वर्षों पुरानी थी और इसकी संरचनात्मक स्थिति बेहद खराब थी। एक हल्का कंपन भी इसे गिरा सकता था।”
प्रशासनिक लापरवाही का सवाल
स्थानीय नागरिकों और विपक्षी नेताओं ने इस घटना को प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम बताया है। बताया जा रहा है कि इस इमारत को पहले ही ठाणे नगर निगम (TMC) की तरफ से खतरनाक घोषित किया गया था, लेकिन किसी तरह की ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
स्थानीय पार्षद ने आरोप लगाया:
“हमने कई बार TMC को पत्र लिखकर इस इमारत को खाली करवाने की मांग की थी, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। अगर समय रहते कदम उठाए जाते तो आज ये मासूम जानें बच सकती थीं।”
पुरानी इमारतें और मुंबई-ठाणे की संकटग्रस्त संरचना
मुंबई और आसपास के उपनगरों जैसे ठाणे, कल्याण, डोंबिवली में हजारों इमारतें 30-40 साल से भी पुरानी हैं। बरसात से पहले हर साल ऐसी इमारतों का निरीक्षण किया जाता है, लेकिन कई बार भ्रष्टाचार, राजनीतिक दबाव और तकनीकी ढिलाई के कारण खतरनाक इमारतों को खाली नहीं करवाया जाता।
बिल्डिंग रिनोवेशन और रिडेवलपमेंट की प्रक्रिया इतनी जटिल और धीमी है कि रहवासी मजबूरी में जर्जर इमारतों में रहना जारी रखते हैं।
स्थानीय लोगों का भय और आक्रोश
दुर्गाड़ी क्षेत्र के निवासी इस घटना के बाद भय और आक्रोश से भर गए हैं। कुछ लोगों ने बताया कि उन्होंने कई बार इमारत की दीवारों में दरारें देखीं थीं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। स्थानीय निवासी रमेश वाघ ने कहा:
“अगर ये हादसा देर रात होता तो मरने वालों की संख्या कहीं ज्यादा होती।”
प्रशासन की प्रतिक्रिया
घटना के बाद ठाणे नगर निगम के आयुक्त और कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका के वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस हादसे पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये मुआवज़ा देने की घोषणा की। इसके साथ ही हादसे की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
विपक्षी दलों ने इस घटना को लेकर सरकार और नगर निकायों की कड़ी आलोचना की है। शिवसेना (उद्धव गुट) और कांग्रेस ने इसे “प्रशासनिक हत्या” करार दिया है और दोषियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की है।
क्या कहती हैं इमारतों की सुरक्षा संबंधी गाइडलाइन्स?
-
हर इमारत को 30 साल के बाद स्ट्रक्चरल ऑडिट कराना अनिवार्य है।
-
खतरनाक घोषित इमारत को खाली करवाने का अधिकार स्थानीय निकाय को होता है।
-
किसी इमारत को खतरनाक घोषित किए जाने के बाद भी उसमें रहना अपराध की श्रेणी में आता है।
दुर्भाग्य से, इन नियमों को न तो स्थानीय निकाय सख्ती से लागू करते हैं और न ही नागरिक इन्हें गंभीरता से लेते हैं।







