नासिक की जिंदल कंपनी में भीषण आग: 24 घंटे बाद भी बेकाबू, फायर ब्रिगेड की टीम लगातार कर रही राहत कार्य
महाराष्ट्र के नासिक जिले में स्थित जिंदल कंपनी की फैक्ट्री में लगी आग अब भी पूरी तरह से काबू में नहीं आ सकी है। यह घटना बीते 24 घंटे पहले शुरू हुई थी, लेकिन अभी भी फैक्ट्री की इमारतें धधक रही हैं और आग की लपटें दूर-दूर से देखी जा सकती हैं। मौके पर कई फायर ब्रिगेड की टीमें लगातार आग बुझाने के प्रयास में लगी हुई हैं, लेकिन आग इतनी विकराल हो चुकी है कि उसे नियंत्रित करना बेहद मुश्किल हो रहा है।
इस आगजनी की घटना ने पूरे नासिक
शहर को झकझोर कर रख दिया है। स्थानीय प्रशासन, दमकल विभाग और पुलिस बल पूरी मुस्तैदी से स्थिति को काबू में लाने में लगे हैं, लेकिन आग की भयावहता को देखते हुए यह कार्य काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है
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आग कैसे लगी?
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आग सबसे पहले फैक्ट्री के उत्पादन खंड में देखी गई। जहां पर भारी मात्रा में ज्वलनशील पदार्थ और रासायनिक कच्चा माल मौजूद था। आशंका जताई जा रही है कि शॉर्ट सर्किट या फिर किसी यंत्र की गड़बड़ी के चलते यह आग लगी, जो देखते ही देखते पूरे प्लांट में फैल गई।
हालांकि, अभी तक आग लगने के
सटीक कारणों की पुष्टि नहीं हो सकी है। मौके पर पहुंची फॉरेंसिक टीम और तकनीकी विशेषज्ञ आग के स्रोत और कारणों की गहन जांच कर रहे हैं।
फैक्ट्री को कितना नुकसान?
जिंदल कंपनी की यह फैक्ट्री नासिक के औद्योगिक क्षेत्र में स्थित है और यह कई वर्षों से लोहे और इस्पात से जुड़ी सामग्री का उत्पादन कर रही है। आग से फैक्ट्री की मशीनें, तैयार माल, रॉ मटेरियल और ऑफिस ब्लॉक भी जलकर खाक हो गए हैं।
हालांकि नुकसान का सही आंकलन अभी नहीं किया जा सका है, लेकिन अनुमान है कि करोड़ों रुपये की संपत्ति इस हादसे में नष्ट हो चुकी है। साथ ही उत्पादन पर भी बड़ा असर पड़ेगा, जिससे कंपनी और उसके कर्मचारियों दोनों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।
राहत और बचा
व कार्य
दमकल विभाग की 12
से अधिक गाड़ियां लगातार आग बुझाने के प्रयास में जुटी हुई हैं। नासिक, मालेगांव, और आसपास के क्षेत्रों से भी फायर यूनिट्स को बुलाया गया है। फायर ऑफिसर ने बताया कि आग को पूरी तरह बुझाने में और कई घंटे या संभवतः दिन भी लग सकते हैं।
घटना के समय फैक्ट्री में करीब 100 कर्मचारी मौजूद थे। प्रशासन और रेस्क्यू टीम ने तत्परता दिखाते हुए अधिकतर लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। हालांकि, कुछ लोग मामूली रूप से झुलस गए हैं जिन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
स्थानीय लोगों में डर और आक्रोश
आसपास के इलाके के लोगों में इस घटना को लेकर काफी डर और चिंता देखी जा रही है। हवा में फैले धुएं और रसायनों की गंध से स्थानीय लोगों की तबीयत बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है। कई लोगों ने अपनी दुकानें और घर खाली कर दिए हैं।
स्थानीय निवासी प्रशासन से यह सवाल कर रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी फै
क्ट्री में अग्निशमन के पर्याप्त उपाय क्यों नहीं थे? क्यों समय रहते आग पर काबू नहीं पाया जा सका? प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि मामले की पूरी जांच की जाएगी और यदि कोई लापरवाही सामने आती है, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया
जिंदल कंपनी में लगी इस आग को मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी संज्ञान में लिया है। मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे स्थिति पर नजर रखें और किसी भी प्रकार की सहायता में कोताही न बरती जाए।
स्थानीय विधायक और सांसद भी घटनास्थल पर पहुंचे और पीड़ितों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि पीड़ितों की हरसंभव मदद की जाएगी और फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों की अनदेखी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
आग के पर्यावरणीय प्रभाव
जैसे-जैसे समय बीत रहा है, आग का असर पर्यावरण पर भी नजर आने लगा है। हवा में धुआं फैलने से वायु गुणवत्ता पर असर पड़ा है और आसपास के पेड़-पौधों पर कालिख की परत दिखने लगी है। पर्यावरण विभाग ने भी मौके से सैंपल लिए हैं और जल्द ही रिपोर्ट जारी की जाएगी।
भविष्य में ऐसे हादसों से बचाव कैसे?
यह घटना एक चेतावनी है कि उद्योगों में सुरक्षा मानकों को हल्के में नहीं लिया जा सकता। फैक्ट्रियों में अग्निशमन प्रणाली, नियमित जांच और कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने की प्रक्रिया को अनिवार्य रूप से अपनाना चाहिए। यदि समय रहते ये उपाय किए जाते, तो शायद इस बड़े हादसे को टाला जा सकता था।








