ज्योति अकेली नहीं थी: ISI के जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश, पाकिस्तानी उच्चायोग बना साजिश का अड्डा, दानिश निकला ISI का मोहरा
देश की सुरक्षा एजेंसियों ने हाल ही में एक सनसनीखेज खुलासा किया है, जिससे यह साफ हो गया है कि भारत में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI (Inter-Services Intelligence) ने एक गहरा और सुनियोजित जासूसी नेटवर्क खड़ा कर रखा था। इसमें केवल एक महिला एजेंट ‘ज्योति’ ही नहीं, बल्कि एक पूरी टीम, योजनाबद्ध तरीके से देश की संवेदनशील सूचनाओं को इकट्ठा कर पाकिस्तान भेजने में जुटी हुई थी।
इस नेटवर्क का केंद्र बना

हुआ था—दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग। वहीं, दानिश नाम का युवक इस पूरे खेल में एक मोहरे की तरह इस्तेमाल किया जा रहा था।
कौन है ज्योति?
ज्योति, जिसे शुरुआत में के
वल एक महिला एजेंट के तौर पर देखा गया, असल में एक गहरे नेटवर्क का हिस्सा थी। प्रारंभिक पूछताछ में खुलासा हुआ कि वह सोशल मीडिया के जरिए देश के सशस्त्र बलों के जवानों से संपर्क बनाती थी और उनसे जानकारी हासिल कर उसे आगे भेजती थी।
लेकिन जब एजेंसियों ने उसकी डिजिटल गतिविधियों, कॉल रिकॉर्ड्स और ट्रांजैक्शन हिस्ट्री को खंगाला, तो पता चला कि वह अकेली नहीं है। उसके पीछे एक पूरी जासूसी मशीनरी काम कर रही थी, जिसका संचालन विदेशी धरती से हो रहा था—विशेष तौर पर पाकिस्तान से।
पाकिस्तानी उच्चा
योग बना साजिश का केंद्र
जांच में यह भी सामने आया कि पाकिस्तान का उच्चायोग, जो राजनयिक रिश्तों का प्रतीक होता है, असल में इस जासूसी नेटवर्क की नर्सरी की तरह इस्तेमाल हो रहा था। भारत सरकार ने पहले भी इस पर चिंता जताई थी कि कुछ पाकिस्तानी राजनयिक जासूसी गतिविधियों में शामिल हैं, लेकिन इस बार जो प्रमाण सामने आए हैं वे चौंकाने वाले हैं।
पाक उच्चायोग से जुड़ी कुछ विशेष मेल और कॉल्स को इंटरसेप्ट किया गया है, जिसमें ज्योति समेत अन्य एजेंटों को निर्देश दिए जा रहे थे। यह स्पष्ट है कि उच्चायोग की आड़ में, खुफिया गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा था।
दानिश – केवल मोहरा या कुछ और?
इस पूरे मामले में एक और नाम तेजी से सामने आया है—दानिश। शुरुआती जांच में उसे सिर्फ एक माध्यम माना गया था, जो ज्योति से संपर्क बनाता था और सूचनाओं का आदान-प्रदान करता था। लेकिन बाद में पता चला कि दानिश भी ISI द्वारा प्रशि
क्षित और नियंत्रित एजेंटों में से एक है।
उसकी ट्रेवल हिस्ट्री, पाकिस्तान में ठहराव और कुछ संदिग्ध फंड ट्रांसफर इस बात की पुष्टि करते हैं कि वह एक निष्क्रिय एजेंट नहीं, बल्कि एक एक्टिव ऑपरेटिव था।
किस तरह काम कर रहा था यह नेटवर्क?
यह नेटवर्क दो हिस्सों में बंटा था:
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डिजिटल जासूसी नेटवर्क – ज्योति जैसी एजेंट सोशल मीडिया, डेटिंग ऐप्स और मेल के जरिए टारगेट तक पहुंच बनाती थीं।
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फिजिकल नेटवर्क – इसमें दानिश जैसे लोग शामिल थे, जो जानकारी इकट्ठा कर उन्हें एनालिसिस के लिए आगे बढ़ाते थे।
पाक उच्चायोग का एक कथित अधिकारी इन दोनों नेटवर्क्स के बीच समन्वय करता था। यह एक अत्यंत खतरनाक और व्यवस्थित ढांचा था जो भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता था।
कैसे हुआ भंडाफोड़?
भारतीय खुफिया एजेंसियों
को कई महीनों से इस नेटवर्क की भनक थी। कई संदिग्ध नंबरों की निगरानी, फेक सोशल मीडिया प्रोफाइल की ट्रैकिंग और संदिग्ध ईमेल आईडीज़ की जांच के बाद एक-एक करके कड़ियां जुड़ती गईं।
आखिरकार, जब ज्योति एक सेना अधिकारी से संवेदनशील डॉक्युमेंट हासिल करने की कोशिश कर रही थी, तभी उसे रंगे हाथों पकड़ा गया। उसी की गिरफ्तारी से पूरा जाल खुला।
क्या हो सकता था नुकसान?
अगर यह नेटवर्क समय पर न
पकड़ा जाता, तो भारत की सुरक्षा रणनीतियों, सैन्य मूवमेंट और रक्षा परियोजनाओं की जानकारी पाकिस्तान के हाथों लग सकती थी। इससे न केवल सैन्य नुकसान होता, बल्कि कूटनीतिक स्तर पर भी भारत को शर्मिंदगी उठानी पड़ सकती थी।
सरकार की सख्त प्रतिक्रिया
इस खुलासे के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया है। भारत में तैनात कुछ पाकिस्तानी राजनयिकों को वापस बुलाने की मांग की जा सकती है। साथ ही सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि ऐसे किसी भी नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जाए।
इसके अलावा, सोशल मीडिया
प्लेटफॉर्म्स को भी अलर्ट किया गया है कि वे संदिग्ध अकाउंट्स पर विशेष निगरानी रखें।
जनता को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
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अनजान प्रोफाइल्स से सोशल मीडिया पर बातचीत न करें
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सेना या सुरक्षा बल से जुड़ी कोई भी जानकारी सार्वजनिक न करें
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किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस या संबंधित एजेंसियों को दें







