जेवर में सेमीकंडक्टर प्लांट की नींव: तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर भारत का बड़ा कदम
भारत में तकनीकी क्रांति की एक और नींव पड़ चुकी है। उत्तर प्रदेश के जेवर में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की आधारशिला रखी गई है, जिसे देश की डिजिटल आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। यह सिर्फ एक औद्योगिक परियोजना नहीं, बल्कि भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनाने की कोशिश है — एक ऐसी दिशा, जो आने वाले दशकों में देश के भविष्य को आकार दे सकती है।
सेमीकंडक्टर क्या
हैं और क्यों हैं महत्वपूर्ण?
सेमीकंडक्टर वे इलेक्ट्रॉनिक चिप्स होते हैं, जो आज की हर डिजिटल तकनीक की रीढ़ हैं — मोबाइल, लैपटॉप, कार, स्मार्ट होम डिवाइस, यहां तक कि मेडिकल उपकरण भी। वर्तमान में, सेमीकंडक्टर का अधिकांश उत्पादन ताइवान, दक्षिण कोरिया और
चीन में होता है। भारत इन पर भारी मात्रा में निर्भर है।
COVID-19 महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में जो व्यवधान आया, उसने भारत को झकझोर कर रख दिया। उस समय कार कंपनियों से लेकर मोबाइल निर्माता तक चिप्स की कमी से जूझते रहे। तब भारत को यह एहसास हुआ कि सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता समय की मांग बन चुकी है।
जेवर क्यों चुना गया?
जेवर, जो नोएडा इंटरनेशनल एयरपो
र्ट के लिए पहले ही चर्चा में है, अब तकनीकी निवेश का भी केंद्र बन रहा है। यह क्षेत्र दिल्ली-एनसीआर के करीब होने के कारण बेहतर कनेक्टिविटी, अवसंरचना और कुशल जनशक्ति उपलब्ध कराता है। यूपी सरकार ने जेवर को “इलेक्ट्रॉनिक्स हब” के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है, जिसमें सेमीकंडक्टर प्लांट प्रमुख भूमिका निभाएगा।
इस प्रोजेक्ट की प्रमुख बातें
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यह प्लांट भारत सरकार की ‘सेमीकंडक्टर मिशन’ का हिस्सा है।
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इसमें हज़ारों करोड़ रुपये का निवेश होने की संभावना है।
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शुरुआती चरण में लगभग 30,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे।
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इसे पीपीपी मॉडल (Public-Private Partnership) में विकसित किया जा रहा है।
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टाटा ग्रुप, वेदांता और कई अंतरराष्ट्रीय तकनीकी कंपनियों की भागीदारी संभावित है।
क्या यह आत्मनिर्भर भारत का मोड़ बिंदु है?
भारत की नीति अब सिर्फ “मेक इन इंडिया” तक सीमित नहीं है, बल्कि “डिजाइन इन इंडिया” और “डिवेलप इन इंडिया” की ओर बढ़ रही है। सेमीकंडक्टर निर्माण एक अत्यधिक जटिल और तकनीकी क्षेत्र है जिसमें हाई-एंड इंजीनियरिंग, साफ-सुथरी फैक्ट्रियां (Clean Rooms) और वैश्विक गुणवत्ता मानकों की ज़रूरत होती है।
इस दिशा में जेवर में नींव पड़ना सिर्फ एक शिलान्यास नहीं, बल्कि भारत के तकनीकी आत्मनिर्भरता की मजबूत शुरुआत है।
ग्लोबल कंपनियों की रुचि
कई वैश्विक कंपनियाँ भारत की विशाल जनसंख्या, नीतिगत स्थिरता और युवा प्रतिभा से प्रभावित हैं। ऐसे में वे भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण को लेकर गंभीर हैं। अमेरिका, जापान और यूरोप की कंपनियों ने भारत के साथ साझेदारी में रुचि दिखाई है।
जेवर प्लांट इन्हीं संभावनाओं को साकार करने का मंच बन सकता है।
चुनौती क्या हैं?
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तकनीकी ज्ञान – भारत को अभी भी उच्च-स्तरीय सेमीकंडक्टर डिजाइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग में अनुभव कम है।
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जल और ऊर्जा की उपलब्धता – सेमीकंडक्टर उत्पादन में शुद्ध जल और सतत ऊर्जा की ज़रूरत होती है।
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ग्लोबल प्रतिस्पर्धा – भारत को ताइवान, कोरिया जैसे दिग्गजों से मुकाबला करना होगा।
लेकिन सरकार और निजी क्षेत्र की संयुक्त कोशिश से इन चुनौतियों को पार किया जा सकता है।
सरकार की नीति और समर्थन
भारत सरकार ने ‘Semicon India Programme’ के तहत 76,000 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन पैकेज घोषित किया है, जो सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग में मदद करेगा। इसके अलावा, राज्य सरकारें भी कर छूट, जमीन, बिजली और पानी जैसी सुविधाएं उपलब्ध करा रही हैं।
जेवर में प्लांट की नींव इस योजना का अप्रत्यक्ष प्रमाण है।
क्या बदलेगा आम जनता के लिए?
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सस्ती तकनीक – जब भारत खुद सेमीकंडक्टर बनाएगा, तो मोबाइल, लैपटॉप और स्मार्ट डिवाइसेस की कीमतें कम हो सकती हैं।
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रोजगार के अवसर – इंजीनियरिंग, आईटी और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में नौकरियों की भरमार होगी।
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टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स को बढ़ावा – स्थानीय चिप निर्माण से हार्डवेयर स्टार्टअप्स को गति मिलेगी।








