घटनास्थल: महाराष्ट्र के चंद्रपुर में सड़क पर हिंसा
महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में एक टोल बूथ पर जो कुछ हुआ, उसने हर उस नागरिक को झकझोर कर रख दिया है जो सड़क नियमों और सार्वजनिक अनुशासन को मानता है। एक साधारण सी टोल फीस मांगना एक कर्मचारी के लिए उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती बन गई।
हादसे का विवरण: गाड़ी रुकती नहीं, रौंदती है
CCTV फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि जैसे ही टोल बूथ पर कर्मचारी ने पिकअप चालक को रोका और टोल राशि मांगी, गाड़ी बिना रुके तेजी से आगे बढ़ गई। चालक ने न केवल टोल बैरियर को तोड़ा, बल्कि टोल कर्मी को बेरहमी से अपनी गाड़ी से कुचल डाला।
चौंकाने वाली बात यह है कि ये घटना कुछ ही सेकंड में घट गई, लेकिन उसका असर पूरे राज्य में कानून व्यवस्था की चर्चा का विषय बन गया है।
कौन था पीड़ित?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित टोल कर्मचारी का नाम राजेश मेश्राम (काल्पनिक नाम) है, जो बीते 5 वर्षों से इस टोल प्लाजा पर कार्यरत था। वह उसी दिन सुबह की शिफ्ट में ड्यूटी पर आया था, और हमेशा की तरह वाहन चालकों से टोल वसूल रहा था।
परिजनों का कहना है कि राजेश हमेशा संयमित और शांत स्वभाव का था। उसे कभी गुस्से या झगड़े की आदत नहीं थी।
आरोपी चालक की पहचान
पुलिस द्वारा प्रारंभिक जांच में आरोपी चालक की पहचान विनोद गेडाम (काल्पनिक नाम) के रूप में की गई है, जो पास के गांव से कुछ सामान लेकर शहर की ओर जा रहा था।
सूत्रों की मानें तो आरोपी पहले भी कई बार टोल कर्मियों से बहस कर चुका है। पूछताछ में उसने यह स्वीकार किया कि उसे गुस्सा आ गया था कि बार-बार पैसे क्यों मांगे जा रहे हैं। टोल कर्मचारी की जान की कीमत?
इस भयावह घटना के बाद कई सवाल उठ रहे हैं:
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क्या टोल कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए कोई मजबूत व्यवस्था नहीं
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है?
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क्या आम जनता को यह अधिकार है कि वे नियम न मानें और हिंसक हो जाएं?
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क्या टोल पर लगे CCTV और बैरियर पर्याप्त हैं?
कई बार टोल कर्मी दुर्व्यवहार का शिकार होते हैं, पर उनकी सुरक्षा के लिए कोई सख्त कानून या आपात सहायता सिस्टम नहीं होता।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
घटना के तुरंत बाद चंद्रपुर पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और घायल क
र्मी को अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने बताया कि उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या का प्रयास), 279 (लापरवाही से वाहन चलाना), और 353 (लोक सेवक पर हमला) के तहत मामला दर्ज किया है।
जिला कलेक्टर ने जांच का आदेश देते हुए कहा,
“सड़क पर कानून तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। टोल कर्मचारियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।”
सोशल मीडिया पर बवाल
यह घटना जैसे ही CCTV वीडियो के साथ सोशल मीडिया पर सामने आई, ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर #TollBoothAttack और #JusticeForTollWorker ट्रेंड करने लगे। लोगों ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा:
“क्या अब ड्यूटी करना भी जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है?”
“ऐसे लोगों को तुरंत जेल भेजा जाए और लाइसेंस रद्द किया जाए।”
सिस्टम में बदलाव की जरूरत
इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब टोल बूथ पर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए भी SOP (Standard Operating Procedure) बनाना जरूरी है:
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हर बूथ पर सिक्योरिटी गार्ड तैनात हों
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इमरजेंसी बटन लगे हों जो पुलिस स्टेशन से जुड़ा हो
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हर कर्मचारी को बॉडी कैमरा दिया जाए
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वाहन चालकों की मानसिकता में बदलाव के लिए अभियान चलाए जाएं
टोल कर्मचारी यूनियन की मांग
राज्य स्तरीय टोल कर्मचारी यूनियन ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि:
“अगर अब भी सरकार ने हमारी सुरक्षा को गंभीरता से नहीं लिया, तो पूरे महाराष्ट्र में टोल सेवाएं बंद कर दी जाएंगी।”
समाज की भूमिका
समाज का हर नागरिक यह समझे कि टोल कर्मचारी भी एक आम इंसान है, जो केवल अपने काम को अंजाम दे रहा है। उसकी जिम्मेदारी सिस्टम के हिस्से की है, न कि निजी फायदे की।
हमें यह जानना होगा कि क्रोध की एक छोटी सी चिंगारी किसी की जिंदगी बुझा सकती है।







