Best News Portal Development Company In India

मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए ‘वनशक्ति

चंद्रपुर, महाराष्ट्र:
वर्तमान समय में जब वन्यजीवों और मनुष्यों के बीच टकराव लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में महाराष्ट्र सरकार और वन विभाग की संयुक्त पहल ‘वनशक्ति-2025’ एक उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है। इस योजना का उद्देश्य न केवल मानव जीवन की रक्षा करना है, बल्कि वन्यजीवों को भी सुरक्षित वातावरण प्रदान करना है।

इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्घाटन व

रिष्ठ नेता और पर्यावरण हितैषी गणेश नाईक ने चंद्रपुर जिले के ब्रह्मपुरी तालुका में एक विशेष समारोह में किया। इस अवसर पर वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, पर्यावरणविद, तकनीकी विशेषज्ञ और स्थानीय ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

क्या है ‘वनशक्ति-2025’?

‘वनशक्ति-2025’ एक बहुस्तरीय रणनीति है जिसका उद्देश्य मानव-वन्यजीव संघर्ष को तकनीक, समुदाय सहभागिता और सतत विकास के सिद्धांतों के माध्यम से कम करना है। इस योजना में अलार्मिंग सिस्टम, जीपीएस ट्रैकिंग, नाइट विज़न कैमरा, सोलर फेंसिंग, और स्थानीय ग्रामीणों की प्रशिक्षण कार्यशालाएं जैसे कई उपाय शामिल किए गए हैं।

सबसे खास बात यह है कि योजना के तहत स्मार्ट अलार्मिंग सिस्टम का प्रायोगिक उपयोग किया गया है, जिससे गांवों के बाहर या सीमावर्ती जंगल क्षेत्रों में जैसे ही कोई बाघ या हाथी जैसे बड़े वन्यजीव घुसते हैं, सिस्टम अपने-आप अलर्ट जारी करता है। यह अलर्ट न केवल ग्रामीणों के मोबाइल पर भेजा जाता है, बल्कि नजदीकी वन विभाग स्टेशन को भी सूचित करता है।

गणेश नाईक का वक्तव्य:

उद्घाटन के अवसर पर श्री गणेश नाईक ने कहा:
“प्रकृति और मनुष्य के बीच संतुलन बनाए रखना 

आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। ‘वनशक्ति-2025’ केवल एक योजना नहीं, बल्कि यह एक चेतावनी है कि यदि हम अभी नहीं जागे, तो आने वाले समय में संघर्ष और गहरा होगा। हम तकनीक का उपयोग करके जंगल और गांव के बीच की दीवार को मजबूत बना सकते हैं — लेकिन संवेदनशीलता और सह-अस्तित्व की भावना के साथ।”

अलार्मिंग सिस्टम कैसे करेगा काम?

  • सेंसर आधारित तकनीक: जंगल के किनारों पर थर्मल सेंसर, मोशन डिटेक्टर और इंफ्रारेड सिस्टम लगाए गए हैं।

  • AI आधारित विश्लेषण: सिस्टम यह पहचानने में सक्षम है कि क्षेत्र में प्रवेश करने वाला प्राणी कौन है — मवेशी, इंसान, या शिकारी वन्यजीव।

  • मल्टीपल अलर्ट मोड: जैसे ही खतरा महसूस होता है, सायरन, लाइट और SMS के माध्यम से अलर्ट जारी किया जाता है।

  • रियल-टाइम लोकेशन शेयरिंग: वन विभाग को तत्काल सूचना मिलती है जिससे फील्ड स्टाफ मौके पर समय रहते पहुंच सकता है।

स्थानीय समुदाय की भागीदारी

‘वनशक्ति-2025’ योजना की खास बात यह है कि यह सिर्फ सरकार या विभाग-आधारित प्रयास नहीं, बल्कि समुदाय-आधारित सहभागिता मॉडल है।
वन विभाग ग्रामीणों को प्रशिक्षित कर रहा है कि वे वन्यजीवों की गतिविधियों की रिपोर्ट कैसे करें, अलार्मिंग सिस्टम का सही उपयोग कैसे करें, और आपातकालीन स्थिति में क्या करें।

इस कार्य के लिए “वनमित्र” नामक

स्वयंसेवी नेटवर्क भी बनाया गया है, जिसमें प्रत्येक गांव से चुने गए कुछ सक्रिय युवक-युवतियों को प्रशिक्षण दिया गया है।

वन्यजीव संरक्षण और सतत विकास का संतुलन

यह योजना न केवल सुरक्षा का उपाय है, बल्कि वन्यजीव संरक्षण, स्थानीय रोजगार, और पर्यावरणीय संतुलन का भी माध्यम बन सकती है। वन विभाग इस प्रणाली को राज्य के अन्य प्रभावित जिलों में भी लागू करने की योजना बना रहा है।

अब तक के प्रभावी परिणाम

हालांकि यह योजना अभी प्रायोगिक चरण में है, लेकिन जहां इसे लागू किया गया है वहां मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में लगभग 60% की गिरावट दर्ज की गई है। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि तकनीक और जागरूकता का मेल वास्तव में कारगर हो सकता है।

भविष्य की योजना:

  • 2025 तक महाराष्ट्र के सभी वन्यजीव संघर्ष-प्रभावित क्षेत्रों में विस्तार

  • अलार्मिंग सिस्टम को सौर ऊर्जा से जोड़ना

  • स्कूलों में पर्यावरण सुरक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल करना

  • मीडिया के माध्यम से जनजागरूकता अभियान

 

 

 

 

 

 

 

 

Awaz Mazha
Author: Awaz Mazha

Share this post:

खबरें और भी हैं...

लाइव टीवी

लाइव क्रिकट स्कोर

चांदी सोने की कीमत

Weather Data Source: Wetter Indien 7 tage

Quick Link