चंद्रपुर, महाराष्ट्र —
मानसून की पहली बारिश के साथ ही चंद्रपुर शहर में जर्जर और खस्ताहाल इमारतों का खतरा एक बार फिर से सतह पर आ गया है। नगर पालिका ने सक्रियता दिखाते हुए शहर के विभिन्न इलाकों में स्थित 54 जर्जर इमारतों की सूची तैयार कर संबंधित मालिकों को नोटिस भेजे हैं। ये इमारतें न सिर्फ वहां रहने वालों के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं, बल्कि राहगीरों और पड़ोसी इमारतों के लिए भी गंभीर खतरा बन सकती हैं।
मनपा की इस कार्यवाही का उ
द्देश्य स्पष्ट है — हादसा होने से पहले चेतावनी देना और जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
54 इमारतें घोषित की गईं “खतरनाक”
शहर के विभिन्न वार्डों में फैली ये इमारतें दशकों पुरानी हैं। इनमें से कई इमारतें ब्रिटिश काल की हो सकती हैं, तो कुछ 40 से 50 साल पुरानी हैं। समय के साथ-साथ मरम्मत ना होने, मौसम की मार, और आधारभूत ढांचे की कमी ने इन इमारतों को जर्जर स्थिति में पहुँचा दिया है।
नगरपालिका की तकनीकी टीम ने स्थानीय सर्वेक्षण और संरचनात्मक मूल्यांकन के आधार पर इन इमारतों को “खतरनाक” श्रेणी में रखा है। इनमें से कुछ इमारतें तो झुकने लगी हैं और कई में दीवारों में दरारें आ चुकी हैं।
नोटिस में क्या लिखा है?
नगरपालिका द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं:
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इमारत को खाली किया जाए
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पुनर्निर्माण अथवा मरम्मत के लिए योजना प्रस्तुत की जाए
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नगर प्रशासन को सहयोग करें, अन्यथा कानूनी कार्रवाई की जाएगी
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यदि कोई अप्रिय घटना होती है, तो इमारत मालिक जिम्मेदार माना जाएगा
यह नोटिस महाराष्ट्र नगरपालिका अधिनियम की धारा 265 के अंतर्गत जारी किए गए हैं, जिससे प्रशासन को यह अधिकार प्राप्त है कि वह खतरनाक संरचनाओं को गिरा भी सकता है।
प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हैं:
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बाबूपेठ
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घुग्घुस रोड
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रामनगर
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चौधरी लेआउट
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गांधी चौक
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टीचर्स कॉलोनी
इन इलाकों में सबसे ज्यादा जर्जर इमारतें पाई गई हैं। कई जगहों पर ये इमारतें संकरी गलियों में स्थित हैं, जिससे किसी भी आपदा में बचाव कार्य मुश्किल हो सकता है।
स्थानीय नागरिकों की प्रतिक्रिया
जहां एक ओर कुछ लोगों ने मनपा की इस कार्यवाही का स्वागत किया है, वहीं कई परिवार परेशान हैं क्योंकि उनके पास रहने के लिए कोई दूसरा विकल्प नहीं है। कुछ किराएदारों और मालिकों का कहना है कि:
“हम मानते हैं कि इमारत पुरानी है, लेकिन हमें रहने के लिए जगह कहां मिलेगी? सरकार को पुनर्वास की व्यवस्था पहले करनी चाहिए।” — स्थानीय निवासी, बाबूपेठ क्षेत्र
नगरपालिका अधिकारियों का कहना है कि वे संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रहे हैं और प्रभावित लोगों को आवश्यक समय व सहायता दी जाएगी।
नगरपालिका की अगली योजना क्या है?
चंद्रपुर महानगरपालिका ने तीन स्तरीय कार्य यो
जना तैयार की है:
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तत्काल चेतावनी और खाली करवाना — खतरनाक इमारतों को खाली कराया जाएगा।
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नवनिर्माण को प्रोत्साहन — भवन मालिकों को नए निर्माण के लिए सहायता और परमिट जल्दी उपलब्ध कराए जाएंगे।
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रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट पर विचार — निजी डेवलपर्स के सहयोग से पुनर्निर्माण की योजना बनाई जा रही है।
भविष्य की चिंता: मानसून के पहले जरूरी कदम
जैसे-जैसे मानसून नजदीक आ रहा है, इन इमारतों का खतरा और भी बढ़ता जा रहा है। बारिश के पानी से दीवारें और कमजोर होंगी, और छतों का गिरना आम बात बन सकती है।
पिछले वर्षों में भी चंद्रपुर में कुछ जर्जर इमारतें मानसून में गिर चुकी हैं, जिनमें जान-माल का नुकसान हुआ था। इसी से सबक लेते हुए प्रशासन ने इस बार समय रहते कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
विशेषज्ञों की राय
सिविल इंजीनियर और शहरी नियोजन विशेषज्ञों के अनुसार:
“पुरानी इमारतों की स्थिति का सालाना मूल्यांकन अनिवार्य होना चाहिए। इसके लिए मनपा को Building Fitness Certificate जैसी व्यवस्था लानी चाहिए, जैसे वाहन की फिटनेस कराई जाती है।”
कानूनी पहलू और दंड
यदि कोई मकान मालिक मनपा के नोटिस को नजरअंदाज करता है और इमारत में रहना जारी रखता है, तो नगरपालिका को यह अधिकार है कि वह:
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इमारत को सील कर दे
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जबरन खाली करवाए
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जुर्माना लगाए
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दुर्घटना की स्थिति में एफआईआर दर्ज कराए
जनजागरूकता अभियान की आवश्यकता
मनपा अब एक जन-जागरूकता अभियान भी शुरू करने जा रही है, जिसमें जनता को बताया जाएगा कि जर्जर इमारतों में रहना कितना खतरनाक है। स्कूलों, कॉलोनियों और मोहल्लों में पोस्टर, पेम्पलेट्स और स्थानीय भाषा में वीडियो के माध्यम से यह जानकारी दी जाएगी।








