नई दिल्ली:
भारत की आंतरिक सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। एक वरिष्ठ खोजी पत्रकार द्वारा किया गया सनसनीखेज खुलासा देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। इस खुलासे के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खालिस्तानी तत्वों द्वारा निशाना बनाए जाने की साजिश रची जा रही है।
यह खबर ऐसे समय में सामने आई है जब भारत में लोकसभा चुनावों की गूंज सुनाई दे रही है और सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।
कौन हैं वो पत्रकार औ
र क्या है उनका दावा?
देश के एक प्रतिष्ठित न्यूज़ नेटवर्क से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार ने अपने विशेष रिपोर्ट में यह दावा किया है कि खालिस्तानी संगठनों की गतिविधियों में हाल के दिनों में तेज़ी आई है, और उनके निशाने पर सीधे प्रधानमंत्री मोदी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विदेशों में बैठे खालिस्तानी नेताओं ने भारत में अस्थिरता फैलाने के लिए डिजिटल और फिजिकल नेटवर्क को सक्रिय किया है।
उनका यह दावा न केवल सुरक्षा एजेंसियों के लिए चेतावनी है, बल्कि यह आम नागरिकों के लिए भी चिंता का विषय है कि राष्ट्र विरोधी ताकतें अब सबसे उच्च स्तर के नेताओं को निशाना बनाने का साहस कर रही हैं।
क्यों गंभीर है यह दावा?
प्रधानमंत्री मोदी देश के सबसे ज़्यादा सुरक्षा घेरे में रहने वाले नेता हैं। फिर भी यदि कोई खुलासा यह दिखाता है कि उनके खिलाफ सुनियोजित आतंकी योजना बनाई जा रही है, तो यह न केवल एक व्यक्ति पर खतरा है, बल्कि यह पूरे राष्ट्र की सुरक्षा प्रणाली पर सवाल है।
खालिस्तानी आंदोलन, जो कभी पंजाब तक सीमित था, अब डिजिटल माध्यमों और अंतरराष्ट्रीय मंचों के जरिए फिर से सर उठा रहा है। ब्रिटेन, कनाडा, और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में बैठे समर्थकों की भारत विरोधी गतिविधियाँ अब प्रत्यक्ष खतरों में बदलती दिख रही हैं।
खालिस्तानी आंदोलन: फिर से क्यों हो रहा है सक्रिय?
खालिस्तानी आंदोलन एक अलग सिख
राज्य की मांग करता है, जिसे “खालिस्तान” कहा जाता है। 1980 और 1990 के दशक में पंजाब में उग्रवाद के दौरान इस आंदोलन ने काफी हिंसा फैलाई थी। भारतीय सेना द्वारा ऑपरेशन ब्लू स्टार और उसके बाद इंदिरा गांधी की हत्या जैसे घटनाक्रमों ने इस आंदोलन को और उग्र बना दिया था।
हाल के वर्षों में:
-
विदेशों में बसे कट्टरपंथी समूहों द्वारा फि
-
र से प्रचार किया जा रहा है।
-
सोशल मीडिया पर झूठा प्रचार, भारत सरकार के खिलाफ।
-
भारतीय दूतावासों पर हमले, जैसे कि लंदन, वैंकूवर, और सैन फ्रांसिस्को में झंडे उतारने की घटनाएँ।
इन घटनाओं ने यह संकेत दिया है कि यह आंदोलन केवल वैचारिक न रहकर, अब सक्रिय और संगठित रूप ले चुका है।
प्रधानमंत्री की सुरक्षा: क्या हैं मौजूदा उपाय?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा SPG (Special Protection Group) द्वारा की जाती है, जो भारत की सबसे विशेष प्रशिक्षित सुरक्षा एजेंसी है। उनके लिए:
-
जेड प्लस कैटेगरी की सुरक्षा
-
बुलेटप्रूफ कार और काफिला
-
ड्रोन और सैटेलाइट निगरानी
-
एनएसजी और रॉ इंटेलिजेंस सपोर्ट
फिर भी, पत्रकार के इस दावे ने यह सवाल उठाया है कि क्या मौजूदा सुरक्षा इंतज़ाम पर्याप्त हैं या नहीं?
डिजिटल युद्ध: नया मैदान
खालिस्तानी ताकतें अब सिर्फ बम या बंदूक से नहीं, बल्कि कीबोर्ड और कैमरा से भी हमला कर रही हैं। फेक न्यूज, नफरत फैलाने वाले वीडियो, और डिजिटल जासूसी जैसे नए हथियार अब खतरनाक हथियार बन चुके हैं।
प्रधानमंत्री की छवि खराब करने, उनके बयानों
को तोड़-मरोड़ कर पेश करने और युवाओं को भड़काने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का भरपूर उपयोग किया जा रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिक्रिया
IB, R&AW और गृह मंत्रालय के सूत्रों
के अनुसार, पत्रकार के दावे की गंभीरता से जांच शुरू कर दी गई है। विदेशी खुफिया एजेंसियों से भी संपर्क साधा जा रहा है, खासकर कनाडा और यूके से, जहां खालिस्तानी गतिविधियों में बढ़ोत्तरी देखी जा रही है।
इसके अलावा:
-
प्रधानमंत्री के आगामी कार्यक्रमों की सुरक्षा समीक्षा की जा रही है
-
संदिग्ध सोशल मीडिया अकाउंट्स की निगरानी तेज की गई है
-
विदेशों में भारतीय मिशनों को अलर्ट पर रखा गया है
जनता और राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रिया
इस खुलासे ने सोशल मीडिया पर तूफान खड़ा कर दिया है।
कुछ लोगों ने इसे राजनीतिक साजिश बताया, तो कुछ ने पत्रकार की साहसिक रिपोर्टिंग की सराहना की।
कांग्रेस और आम आदमी पार्टी जैसे दलों ने बयानबाज़ी से दूरी बनाए रखी, जबकि BJP नेताओं ने इसे पाकिस्तान समर्थित साजिश बताया।







