ई दिल्ली —
राजनीति और प्रवर्तन एजेंसियों के रिश्तों में एक बार फिर से हलचल मची है। चर्चित व्यापारी संजय भंडारी के खिलाफ चल रहे मनी लॉन्ड्रिंग केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा को समन भेजा है। उन्हें आज दिल्ली
स्थित ED कार्यालय में पूछताछ के लिए बुलाया गया है।
यह मामला लंबे समय से चल रहा है, लेकिन एक बार फिर यह सुर्खियों में आ गया है क्योंकि इसमें शामिल नाम सीधे तौर पर राजनीति और सत्ता से जुड़े हुए हैं।
मामला क्या है?
संजय भंडारी, एक हथियार सौदागर और कारोबारी हैं, जिन पर विदेशों में अवैध संपत्तियों की खरीद, हवाला लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे संगीन आरोप हैं। भंडारी के खिलाफ इन्वेस्टिगेशन के दौरान कई दस्तावेज मिले थे, जिनमें कथित तौर पर रॉबर्ट वाड्रा का नाम सामने आया।
वाड्रा पर आरोप है कि उन्होंने लंदन में एक महंगी प्रॉपर्टी की खरीद में भंडारी से जुड़ी कंपनियों की मदद ली थी। हालांकि, रॉबर्ट वाड्रा ने इन आरोपों से हमेशा इनकार किया है और कहा है कि यह सब राजनीतिक साजिश है।
ED का समन
प्रवर्तन निदेशालय ने वाड्रा को समन जारी कर पूछताछ के लिए आज बुलाया है। उनसे यह जानने की कोशिश की जाएगी कि:
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क्या उनका संजय भंडारी से कोई कारोबारी संबंध था?
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लंदन प्रॉपर्टी डील में उनकी कोई भूमिका थी?
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क्या उन्होंने मनी ट्रेल को छुपाने के लिए कोई कंपनियों या माध्यमों का इस्तेमाल किया?
ED के अधिकारियों के अनुसार, वाड्रा को जवाबदेही और दस्तावेजी प्रमाण के साथ उपस्थित होना होगा।
पहले भी हो चुकी है पूछताछ
यह पहली बार नहीं है जब वाड्रा को इ
स केस में पूछताछ के लिए बुलाया गया हो। 2019 और 2020 में भी उनसे कई दौर की पूछताछ हो चुकी है। तब उन्होंने सभी आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध बताया था।
उन्होंने कहा था:
“मैं एक स्वतंत्र नागरिक हूं। मेरे खिलाफ बार-बार कार्रवाई सिर्फ इसलिए हो रही है क्योंकि मैं एक राजनीतिक परिवार से जुड़ा हूं।”
राजनीतिक हलकों में हलचल
इस मामले ने एक बार फिर से कांग्रेस और भाजपा के बीच तीखी बयानबाजी को हवा दे दी है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि ED और CBI जैसी संस्थाओं का इस्तेमाल सरकार अपने राजनीतिक विरोधियों को डराने के लिए कर रही है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा:
“यह सब 2024 के आम चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल बिगाड़ने की साजिश है। रॉबर्ट वाड्रा का इस मामले से कोई संबंध नहीं है।”
वहीं, भाजपा नेताओं का कहना है कि कानून अप
ना काम कर रहा है और कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है।🌐 लंदन प्रॉपर्टी का विवाद
जिस संपत्ति की बात हो रही है, वह लंदन के बेहद पॉश इलाके में स्थित एक मकान है, जिसकी कीमत करोड़ों में है। आरोप है कि इस मकान को खरीदने में भंडारी की मदद से काले धन का इस्तेमाल किया गया।
ED के पास कथित तौर पर ऐसे दस्तावेज हैं जो इस खरीद-फरोख्त को रॉबर्ट वाड्रा से जोड़ते हैं। जांच एजेंसियों ने कहा है कि भंडारी की कंपनियों और वाड्रा की कथित ईमेल बातचीत भी सामने आई है।
हालांकि, वाड्रा के वकीलों का कहना है कि संपत्ति उनके नाम पर नहीं है, और ना ही उन्होंने कभी इस तरह की कोई डील की।🔍 ED की जांच में क्या हो सकता है?
आज की पूछताछ में ED वाड्रा से:
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फाइनेंशियल स्टे
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टमेंट्स,
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अंतरराष्ट्रीय लेनदेन के सबूत,
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लंदन यात्रा का विवरण,
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और भंडारी से कोई भी व्यक्तिगत/व्यावसायिक संपर्क
के बारे में जानकारी मांगेगी।
सूत्रों के अनुसार, यदि वाड्रा संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाते हैं तो उन्हें आगे की पूछताछ के लिए दोबारा बुलाया जा सकता है, या फिर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
क्या यह राजनीतिक बदले की कार्रवाई है?
राजनीतिक विश्लेषकों की राय बंटी हुई है। कुछ इसे एक कानूनी प्रक्रिया मानते हैं, तो कुछ इसे सरकार की राजनीतिक रणनीति बताते हैं।
विशेषज्ञ कहते हैं कि यदि रॉबर्ट वाड्रा दोषी हैं, तो कानून उन्हें दंडित करेगा, लेकिन यदि ऐसा नहीं है, तो यह कार्रवाई राजनीतिक रूप से उल्टा असर भी डाल सकती है।
जनता का नजरिया
सोशल मीडिया पर यह खबर तेजी से वायरल हो रही है। जहां एक वर्ग इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ जरूरी कदम मानता है, वहीं दूसरा वर्ग इसे राजनीतिक उत्पीड़न करार दे रहा है।
लोग जानना चाहते हैं कि क्या सच में इतने सालों से लंबित इस केस में अब कोई निर्णायक मोड़ आएगा, या फिर यह भी अन्य मामलों की तरह राजनीतिक धुंध में खो जाएगा।








