कर्नाटक में मानसून का प्रकोप: भारी बारिश से बाढ़ जैसे हालात, धारवाड़ के स्कूलों में छुट्टियां घोषित, मौसम विभाग का रेड अलर्ट जारी
कर्नाटक में मानसून के आगमन के साथ ही भारी बारिश का दौर शुरू हो चुका है। बीते कुछ दिनों से राज्य के कई जिलों में मूसलाधार बारिश हो रही है, जिससे जनजीवन पूरी तरह से प्रभावित हो गया है। खासकर धारवाड़, बेलगावी, उत्तरा क
न्नड़ और हासन जिलों में जलभराव और बाढ़ जैसे हालात बन चुके हैं।
धारवाड़ जिले में तो हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि जिला प्रशासन को स्कूलों
में छुट्टी घोषित करनी पड़ी है। वहीं मौसम विभाग (IMD) ने आगामी 48 घंटों के लिए रेड अलर्ट जारी करते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त
कर्नाटक के उत्तरी और तटीय क्षेत्रों में पिछले 72 घंटों से लगातार बारिश हो रही है। नदियां उफान पर हैं, सड़कों पर पानी भर गया है और कई गांवों का संपर्क मुख्य शहरों से टूट गया है। घरों और दुकानों में पानी घुसने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
धारवाड़ जिले के कई हिस्सों में सड़कें तालाब बन गई हैं। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। स्कूलों और कॉलेजों में पानी भरने के कारण कक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं।
धारवाड़ में स्कूलों की छुट्टी घोषित
धारवाड़ जिला प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिले के सभी शैक्षणिक संस्थानों में अगले आदेश तक छुट्टी घोषित कर दी है। उपायुक्त गुरुदत्त हेगड़े ने बताया कि बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
शहर के कई क्षेत्रों में स्कूल बसें पानी में फंस गईं, जिससे बच्चों को सुरक्षित निकालने के लिए प्रशासन को नावों की मदद लेनी पड़ी। ऐसे में स्कूलों को बंद रखना जरूरी हो गया है।
मौसम विभाग का रेड अलर्ट
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कर्नाटक के कई जिलों में अगले दो दिनों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। विशेष रूप से तटीय और पश्चिमी घाटों से सटे क्षेत्रों में अत्यधिक भारी वर्षा की संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। हवा की रफ्तार 40 से 60 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।
प्रशासन पूरी तरह अलर्ट पर
राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने आपात स्थिति से निपटने के लिए NDRF और SDRF की टीमों को तैनात कर दिया है। कंट्रोल रूम 24 घंटे सक्रिय है और राहत व बचाव कार्य तेज कर दिए गए हैं।
बाढ़ संभावित क्षेत्रों में नावें, राशन, पीने का पानी और दवाइयों का इंतजाम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे किसी भी स्थिति में ढील न बरतें और जनता को तत्काल सहायता उपलब्ध कराएं।
ग्रामीण क्षेत्रों की हालत ज्यादा खराब
शहरों की तुलना में ग्रामीण इलाकों में स्थिति ज्यादा चिंताजनक है। खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। कई गांवों में बिजली और संचार की व्यवस्था ठप हो गई है। लोग ऊंचे स्थानों पर शरण ले रहे हैं।
कुछ जगहों पर पुल बह गए हैं जिससे यातायात पूरी तरह ठप है। ग्रामीणों को सुरक्षित निकालने के लिए प्रशासन को नावों और ट्रैक्टरों का सहारा लेना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों की आपबीती
धारवाड़ की एक निवासी सविता पाटिल बताती हैं, “पिछले तीन दिनों से लगातार बारिश हो रही है। घर में पानी भर गया है और बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है। बच्चों की पढ़ाई भी ठप हो गई है।”
इसी तरह बेलगावी के एक किसान रमेश नाइक कहते हैं, “धान और मक्का की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। हमें नहीं पता अब गुजारा कैसे होगा। सरकार को तुरंत मुआवजा देना चाहिए।”
सावधानी ही सुरक्षा है
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें, जलभराव वाले इलाकों में न जाएं और प्रशासन द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करें।
सरकार से उम्मीदें
लोगों की नजरें अब राज्य सरकार और राहत एजेंसियों पर टिकी हैं। यदि स्थिति जल्द काबू में नहीं आई तो जनहानि का खतरा बढ़ सकता है। सरकार को चाहिए कि वह त्वरित राहत व पुनर्वास के कदम उठाए।








