BSF जवानों को ड्यूटी पर भेजा जर्जर और गंदी ट्रेन से: रेलवे की लापरवाही पर मचा बवाल, मंत्री ने 4 अधिकारियों को किया निलंबित
देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले बहादुर BSF जवान जब अपनी ड्यूटी पर जाते हैं, तो पूरे देश की उम्मीदें उनके साथ होती हैं। लेकिन जब उन्हीं जवानों को ड्यूटी पर भेजने के लिए गंदगी से भरी, जर्जर हालत में ट्रेन दी जाए, तो यह न केवल सिस्टम की असंवेदनशीलता को दर्शाता है बल्कि पूरे देश की आत्मा को झकझोर कर रख देता है।
हाल ही में ऐसा ही एक मामला सामने आया, जब BSF जवानों को पश्चिम
बंगाल के मालदा से जम्मू-कश्मीर की ओर ड्यूटी पर रवाना किया गया। लेकिन जिस ट्रेन से उन्हें भेजा गया, उसकी हालत इतनी दयनीय थी कि उसके अंदर बैठना भी चुनौती से कम नहीं था।
जवानों की हालत देख आंखें नम हो गईं
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और तस्वीरों में देखा गया कि ट्रेन की सीटें फटी हुई थीं, फर्श पर गंदगी फैली थी, पंखे और लाइटें काम नहीं कर रही थीं। शौचालयों की स्थिति इतनी खराब थी कि जवानों को मजबूरी में बाहर का सहारा लेना पड़ा।
ये वही जवान हैं जो 45 डिग्री तापमान में रेगिस्तान में खड़े रहते हैं और -20 डिग्री में बर्फ के बीच चौकसी करते हैं, ताकि हम चैन की नींद सो सकें। लेकिन उन्हें जिस तरह की ट्रेन दी गई, वह न केवल अपमानजनक था, बल्कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी खतरनाक था।
रेलवे मंत्री ने लिया तत्काल संज्ञान
घटना की जानकारी मिलते ही रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने तुरंत एक्शन लेते हुए 4 संबंधित अधिकारियों को निलंबित कर दिया। उनके अनुसार, “सेना और सुरक्षा बलों के जवान हमारे राष्ट्र का गौरव हैं। उनके साथ कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
रेलवे बोर्ड की एक जांच समिति बनाई गई है जो यह सुनिश्चित करेगी कि ऐसा दोबारा न हो और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।
रेलवे की लापरवाही की कहानी पहली बार नहीं
यह पहली बार नहीं है जब रेलवे में इस तरह की लापरवाही सामने आई है। पहले भी कई बार VIP यात्रियों को प्राथमिकता देने के चक्कर में सुरक्षा बलों को खराब कोच दिए गए हैं।
इस मामले में भी कहा जा रहा है कि जवानों के लिए
एक बेहतर ट्रेन तय की गई थी, लेकिन आखिरी समय पर उसे बदल दिया गया और पुराने कोच थमा दिए गए।
यह सवाल उठाता है कि क्या जवानों के सम्मान और सुविधा के लिए बने नियम केवल कागज़ों तक ही सीमित हैं?
BSF जवानों का दर्द: “क्या हम इस लायक हैं?”
घटना के बाद कुछ जवानों ने नाम न छापने की शर्त पर मीडिया से बात की। उन्होंने कहा:
“हम अपनी जान हथेली पर रखकर देश की सेवा करते हैं। हम कोई सुविधा नहीं मांगते, लेकिन क्या इतना भी हक नहीं कि ड्यूटी पर जाते समय कम से कम साफ-सुथरी ट्रेन मिले?”
उनकी आवाज़ हर भारतीय के दिल को छू गई। सोशल मीडिया पर लोगों ने भी अपना गुस्सा जाहिर करते हुए रेलवे की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
सुरक्षा बलों के लिए अलग व्यवस्था की मांग
कई रक्षा विशेषज्ञों और पूर्व सैन्य अधिकारियों ने कहा है कि BSF, CRPF, ITBP जैसे अर्धसैनिक बलों के लिए अलग लॉजिस्टिक विंग और यात्रा सुविधा होनी चाहिए, जिससे वे सम्मान और सुरक्षा दोनों के साथ अपने गंतव्य तक पहुंच सकें।
सरकार से यह भी मांग की जा रही है कि सेना और अर्धसैनिक बलों के लिए रेलवे में “सेना सुविधा कोच” की संख्या बढ़ाई जाए, जो नियमित रूप से जांचे-परखे जाएं।
संसद और जनता की प्रतिक्रिया
इस मुद्दे को संसद में भी उठाए जाने की संभावना है। कई सांसदों ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी है और रेलवे से जवाब मांगा है।
विपक्षी दलों ने सरकार से पूछा है कि “One Rank One Pension” और “देश के जवान पहले” जैसे नारे क्या केवल चुनावी वादे हैं, या उनका जमीनी हकीकत से कोई वास्ता भी है?
अब आगे क्या?
रेल मंत्री द्वारा उठाया गया तात्कालिक कदम सराहनीय है, लेकिन इससे बड़ी ज़िम्मेदारी यह सुनिश्चित करने की है कि आगे ऐसा दोबारा न हो। इस दिशा में कुछ जरूरी कदम हो सकते हैं:
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सभी सैनिक यात्रा कोच की नियमित निगरानी और मेंटेनेंस
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सैनिकों के लिए अलग और स्वच्छ भोजन और जल की व्यवस्था
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हर ट्रिप से पहले सैन्य अधिकारियों द्वारा ट्रेनों की जांच
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लॉजिस्टिक्स के लिए एक अलग डेडिकेटेड टीम








