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आत्मविश्वास है जीत की कुंजी; IND vs ENG

भूमिका: चुनौती या अवसर?

क्रिकेट केवल एक खेल नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की भावना है। और जब टीम इंडिया इंग्लैंड दौरे पर जाती है, तो उम्मीदें आसमान छूती हैं। लेकिन इस बार की स्थिति थोड़ी अलग है। IND vs ENG 2025 टेस्ट और वनडे सीरीज में भारत

के तीन सबसे अनुभवी खिलाड़ीरोहित शर्मा, विराट कोहली और रविचंद्रन अश्विन — टीम का हिस्सा नहीं होंगे।

क्या बिना इन दिग्गजों के टीम इंडि

या एक यादगार दौरा कर पाएगी? इस सवाल का जवाब दिया है टीम इंडिया के नए कोच गौतम गंभीर ने, और उनके जवाब में छिपा है आत्मविश्वास, नई सोच और युवाओं पर भरोसा।

तीन अनुभवी खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी: कितनी बड़ी चुनौती?

टीम से बाहर हुए खिलाड़ी ना केवल अनुभव के स्तंभ थे, बल्कि मैच के दौरान रणनीति और नेतृत्व में भी अहम भूमिका निभाते थे:

  1. रोहित शर्मा – कप्तानी का विशाल अनुभव, संयमित ओपनिंग

  2. विराट कोहली – रन मशीन और मिडिल ऑर्डर की रीढ़

  3. रविचंद्रन अश्विन – सबसे स्मार्ट स्पिनर और ऑलराउंडर

इनकी अनुपस्थिति में टीम का संतुलन प्रभावित होना तय है, लेकिन कोच गौतम गंभीर ने इसे “अवसर” की तरह देखा है, न कि “संकट” के रूप में

गौतम गंभीर का नजरिया: युवा ही हैं असली ऊर्जा

टीम इंडिया के नए हेड कोच गौतम गंभीर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा:

“हमें अनुभव की कमी से

ज्यादा आत्मविश्वास और भूख दिखाने की जरूरत है। यही वो दौरा है, जहां युवा खिलाड़ी अपनी पहचान बना सकते हैं।”

उन्होंने साफ किया कि वह टीम को रनिंग स्टालवर्ट्स पर निर्भर नहीं रहने देना चाहते, बल्कि भविष्य की तैयारियों को अभी से शुरू करना चाहते हैं।

युवाओं को मिल रहा है बड़ा मंच

गंभीर की रणनीति का मूल है युवाओं को स्वतंत्रता देना और दबाव में उन्हें परखना। टीम में चुने गए कुछ नए चेहरे हैं:

  • यशस्वी जायसवाल – आक्रामक ओपनर, जिन्होंने IPL और घरेलू क्रिकेट में कमाल किया है

  • शुभमन गिल – विराट की जगह मिडिल ऑर्डर में जिम्मेदारी

  • रवि बिश्नोई/वाशिंगटन सुंदर

  •  स्पिन विभाग में नई उम्मीद

गंभीर का मानना है कि यदि इन खिलाड़ियों को विश्वास और अवसर मिले, तो वे अगली पीढ़ी के “मैच विनर” बन सकते हैं।

टीम की तैयारी: किस दिशा में काम हो रहा है?

गौतम गंभीर ने कुछ अहम बिंदुओं पर काम करने की बात कही:

  1. मेंटल कंडीशनिंग:
    खिलाड़ियों को इंग्लैंड की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में मानसिक रूप से तैयार किया जा रहा है।

  2. स्वतंत्रता से खेलने की रणनीति:
    “डर के आगे जीत है” – इस सिद्धांत पर गंभीर युवाओं को आक्रामक और बेखौफ खेलने की छूट दे रहे हैं।

  3. रोल क्लैरिटी:
    हर खिलाड़ी को अपनी भूमि

  4. का स्पष्ट रूप से समझाई गई है। किसी भी तरह की अनिश्चितता नहीं होगी।

  5. सहयोगी स्टाफ और डेटा एनालिटिक्स:
    गंभीर आधुनिक तकनीक और आंकड़ों के जरिए मैच की रणनीति बना रहे हैं।

इंग्लैंड दौरे की खास चुनौतियां

इंग्लैंड की पिचें भारत से पूरी तरह अलग हैं। यहां स्विंग और सीम का बोलबाला होता है। यहां कुछ प्रमुख चुनौतियां होंगी:

  • कंडीशंस में ढलना: बादल, ठंड और हरी पिचें बल्लेबाजों के लिए चुनौती होंगी।

  • घरेलू भीड़ का दबाव: इंग्लैंड की भीड़ आक्रामक और रणनीतिक होती है।

  • बॉलर की टेस्ट: क्या भारतीय तेज गेंदबाज एंडरसन, ब्रॉड जैसे खिलाड़ियों की रणनीति को टक्कर दे सकेंगे?

इन सब के बीच गंभीर की कोचिंग और नए खून की हिम्मत ही टीम इंडिया की सबसे बड़ी ताकत हो सकती है।

गंभीर का मिशन: टीम इंडिया 2.0

गौतम गंभीर का कोच बनना केवल पद परिवर्तन नहीं है, बल्कि एक सोच का बदलाव है। वह स्पष्ट कह चुके हैं कि उन्हें “सुपरस्टार्स” की नहीं, “टीम के लिए खेलने वालों” की ज़रूरत है।

उनकी कोचिंग शैली व्यक्तिगत प्रदर्शन से ज़्यादा सामूहिक जीत और देशभक्ति की भावना पर आधारित है। यही बात उन्हें एक अलग तरह का कोच बनाती है।

क्रिकेट प्रशंसकों की राय

सोशल मीडिया और क्रिकेट एक्सपर्ट्स में भी इस विषय पर चर्चा जोरों पर है:

  • कुछ का कहना है कि बिना रोहित-विराट जैसे अनुभवी खिलाड़ियों के इंग्लैंड में जीत मुश्किल है

  • जबकि कई लोग गंभीर की सोच को सही मानते हैं और मानते हैं कि “हर चैंपियन की शुरुआत एक मौके से होती है

 

 

 

 

 

 

 

 

Awaz Mazha
Author: Awaz Mazha

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