मुख्य लेख: भारत की रक्षा ताकत और वैश्विक प्रभाव
प्रस्तावना: आत्मनि
र्भर भारत की उड़ान
“जब भारत आत्मनिर्भर होता है, तो दु
निया उसकी ताकत को पहचानती है।”
भारत अब न केवल अपने लिए हथियार बना रहा है, बल्कि उन्हें दुनिया के सबसे बड़े रक्षा बाजारों में बेच भी रहा है। ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत, भारत ने अपनी रक्षा प्रणाली को आत्मनिर्भर और निर्यात-योग्य बनाया है।
2025 तक भारत का लक्ष्य है कि वह दुनिया के शीर्ष 25 रक्षा निर्यातक देशों में शामिल हो जाए। इस दिशा में भारत ने जो कदम उठाए हैं, उसने न केवल चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों को चिंतित किया है, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में भी हलचल पैदा कर दी है।
भारत के प्रमुख स्वदेशी हथियार: जो कर रहे हैं दुनिया को प्रभावित
1. तेजस लड़ाकू विमान (LCA Tejas)
-
स्वदेशी रूप से विकसित हल्का लड़ाकू विमान
-
HAL द्वारा निर्मित
-
मल्टीरोल कैपेबिलिटी: एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड हमले
-
मलेशिया ने खरीदने में दिखाई
-
रुचि, मिस्र और अर्जेंटीना जैसे देशों ने भी प्रस्ताव मांगे हैं
-
चीन के JF-17 से कहीं बेहतर तकनीकी प्रदर्शन
2. ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल
-
भारत-रूस संयुक्त उपक्रम
-
300+ किमी रेंज, ध्वनि की गति से तीन गुना तेज
-
फिलीपींस ने पहला ऑर्डर दिया, कई ASEAN देश लाइन में
-
पाकिस्तान के लिए बड़ी चिंता का कारण
3. अर्जुन मेन बैटल टैंक (Arjun MBT)
-
DRDO द्वारा विकसित
-
अत्याधुनिक फायर कंट्रोल सिस्टम
-
रक्षामंत्री के अनुसार “पाकिस्तान के किसी भी टैंक से ज्यादा ताकतवर”
4. अकाश मिसाइल सि
स्टम
-
एयर डिफेंस मिसाइल
-
25 किमी की रेंज, 96% हिट रेट
-
सऊदी अरब, वियतनाम और इंडोनेशिया ने रूचि दिखाई है
5. पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर
-
75 किमी तक मारक क्षमता
-
युद्ध में तीव्रता से जवाब देने की क्षमता
-
चीन सीमा पर तैनात
भारत का रक्षा निर्यात: आंकड़ों की नजर से
-
2014-15 में रक्षा निर्यात ₹2,000 करोड़ था
-
2023-24 में यह आंकड़ा ₹21,000 करोड़ के पार
-
85 से ज्यादा देशों को भारतीय रक्षा उत्पादों की आपूर्ति
-
रक्षा मंत्रालय ने 2025 तक ₹35,000 करोड़ निर्यात का लक्ष्य रखा है
वैश्विक मंच पर भारत की छवि: अब ग्राहक नहीं, निर्माता
भारत अब केवल आयातक नहीं, बल्कि एक प्रमुख डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब बनता जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “आत्मनिर्भर भारत” को मजबूत करते हुए FDI की सीमा बढ़ाई, डिफेंस सेक्टर में प्राइवेट पार्टनरशिप को प्रोत्साहित किया और कई पुराने नियमों को सरल बनाया।
चीन और पाकिस्तान की चिंता: क्यों हो रही खलबली?
🇨🇳 चीन की रणनीतिक अस्थिरता
-
ब्रह्मोस की तैनाती से चीन को लग रहा है दबाव
-
अक्साई चिन और अरुणाचल में भारत की मिसाइल रेंज पहुंच रही
-
तेजस जैसे विमान ASEAN देशों को मिलने से क्षेत्र में भारत का दबदबा बढ़ेगा
🇵🇰 पाकिस्तान की बेचैनी
-
अर्जुन और ब्रह्मोस की संयुक्त ताकत पाकिस्तान की सीमाओं पर खड़ी है
-
भारत के निर्यात से पाकिस्तानी डिफेंस मार्केट को नुकसान
-
आर्थिक रूप से कमजोर पाकिस्तान प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहा
रक्षा बाजार में भारत का रणनीतिक लाभ
-
राजनीतिक स्थिरता: दुनिया को भारत पर भरोसा है
-
सस्ती लागत: भारतीय हथियारों की कीमत प्रतिस्पर्धी
-
तकनीकी गुणवत्ता: ब्रह्मोस, तेजस जैसे उत्पाद साबित हो चुके हैं
-
डिप्लोमैटिक रिलेशन: डिफेंस निर्यात के जरिए भारत ने कई देशों से संबंध मजबूत किए
भविष्य की योजना: भारत का रोडमैप
-
डिफेंस कोरिडोर: उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में निर्माण तेज
-
निजी कंपनियों की भागीदारी: टाटा, महिंद्रा, लार्सन एंड टुब्रो जैसे उद्योग अब सक्रिय
-
रिसर्च एंड डेवलपमेंट: DRDO और HAL में निवेश बढ़ाया गया
-
स्टार्टअप इनोवेशन: युवाओं को रक्षा स्टार्टअप शुरू करने के लिए अनुदान







