अब ईरान का खेल खत्म! ट्रंप ने कहा—बिना शर्त सरेंडर करो, खामेनेई ने भी दिया तीखा जवाब, यहूदियों पर नहीं होगी कोई रहम, जंग की शुरुआत हो चुकी है!
पश्चिम एशिया में तनाव की आग एक बार फिर भड़क चुकी है। अमेरिका और ईरान के बीच के संबंध अब बेहद नाजुक मोड़ पर हैं। डोनाल्ड ट्रंप, जो कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति हैं और 2024 के चुनावों में फिर से प्रमुख दावेदार बनकर उभरे हैं, ने एक बार फिर अपनी ईरान-विरोधी नीतियों के तहत बड़ा बयान दिया है। उन्होंने ईरान से “बिना किसी शर्त के समर्पण” की मांग की है।
ट्रंप के इस बयान ने जहां वै
श्विक राजनीति में खलबली मचा दी है, वहीं ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने भी इसका कड़ा जवाब दिया है। खामेनेई ने साफ कहा है कि अब यहूदी राष्ट्र (इस्राइल) के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जाएगी और “यह जंग अभी शुरू हुई है।”
यह घटनाक्रम सिर्फ दो देशों के बीच
की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे संघर्ष की आहट है जो पूरी दुनिया की सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं क्या है मामला, क्या हैं इसके पीछे के राजनीतिक समीकरण और क्या हो सकते हैं इसके वैश्विक परिणाम।
ट्रंप का आक्रामक रुख – पुराना एजेंडा फिर से सक्रिय
ट्रंप हमेशा से ही ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाते रहे हैं। उनके राष्ट्रपति कार्यकाल में ईरान के साथ 2015 में हुए परमाणु समझौते से अमेरिका बाहर निकल गया था। अब जब ट्रंप फिर से चुनावी मैदान में हैं, तो उन्होंने पुराने एंटी-ईरान एजेंडे को दोहराना शुरू कर दिया है।
हाल ही में दिए गए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा:
“ईरान को अब समझ जाना चाहिए कि वह अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ नहीं खेल सकता। अगर उसे युद्ध नहीं चाहिए, तो उसे तुरंत और बिना शर्त सरेंडर करना होगा।”
खामेनेई की चुनौती – ‘अब रहम नहीं होगा’
ट्रंप के बयान का जवाब देते हुए ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई ने भी स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इस्राइल अब ईरान की सहनशक्ति की परीक्षा न लें। खामेनेई ने अपने भाषण में यहूदियों को निशाना बनाते हुए कहा:
“अब समय आ गया है कि ज़ुल्म का
हिसाब लिया जाए। हम किसी पर रहम नहीं करेंगे, जंग अभी शुरू हुई है।”
उनकी यह टिप्पणी सीधे तौर पर इस्राइल की ओर इशारा करती है, जो पहले से ही हमास और हिज़बुल्लाह के साथ चल रहे संघर्ष में उलझा हुआ है।
इसके पीछे के भू-राजनीतिक कारण
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इस्राइल-ईरान तनाव: दोनों देशों के बीच लंबे समय से दुश्मनी रही है, खासकर इस्राइल के परमाणु विरोध और ईरान के समर्थन से चलने वाले आतंकवादी गुटों के कारण।
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अमेरिका की रणनीतिक पॉलिसी: ट्रंप अमेरिका को फिर से वर्ल्ड पावर के रूप में स्थापित करने के एजेंडे पर काम कर रहे हैं, और इसमें मध्यपूर्व में वर्चस्व हासिल करना मुख्य बिंदु है।
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तेल और संसाधन: ईरान एक प्रमुख तेल उत्पादक देश है। अमेरिका की कोशिश है कि वह ईरान पर नियंत्रण रखे ताकि वैश्विक तेल बाजार में उसका दबदबा बना रहे।
वैश्विक असर – क्या होगी अगली चाल?
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अगर यह विवाद और गहरा होता है, तो मिडिल ईस्ट में एक नई जंग छिड़ सकती है जिसका असर एशिया, यूरोप और अमेरिका पर भी होगा।
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तेल की कीमतों में भारी उछाल आएगा।
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संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं दवाब में होंगी कि वे किसका पक्ष लें।
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भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति बेहद संवेदनशील होगी क्योंकि वह ईरान और अमेरिका दोनों के साथ व्यापारिक संबंध रखता है।








