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केंद्र ने राज्यों को दिसंबर तक दी डेडलाइन

2024 में बदलेगा शहरी भूमि स्वामित्व का चेहरा: केंद्र सरकार ने भूमि सुधार पायलट प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए राज्यों को दिसंबर तक का दिया समय

भारत सरकार शहरी विकास की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही है। देश के विभिन्न शहरों में चल रहे भूमि सुधार के पायलट प्रोजेक्ट को इसी वर्ष दिसंबर 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस दिशा में केंद्र सरकार ने सभी संबंधित राज्य सरकारों को निर्देश दिए हैं कि वे समयबद्ध तरीके से इस योजना को तत्काल प्रभाव से लागू करें और निर्धारित समय-सीमा में आवश्यक बदलावों को अंतिम रूप दें।

यह पायलट प्रोजेक्ट केवल का

गज़ी दस्तावेजों में सुधार भर नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य शहरी भूमि व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्षता और डिजिटल सटीकता लाना है। यह सुधार भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण, संपत्ति के स्वामित्व की स्पष्टता, अतिक्रमण की रोकथाम, और स्मार्ट सि

टी विकास जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

 भूमि सुधार पायलट प्रोजेक्ट का उद्देश्य क्या है?

शहरी भूमि सुधार का पायलट प्रोजेक्ट विशेष रूप से निम्नलिखित उद्देश्यों को लेकर संचालित किया जा रहा है:

  1. भूमि रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण और अद्यतन

  2. संपत्ति स्वामित्व की वैधता और स्पष्टता सुनिश्चित करना

  3. राजस्व संग्रह की प्रणाली को सशक्त बनाना

  4. अवैध कब्जों, झुग्गी बस्तियों और अनधिकृत निर्माणों पर अंकुश लगाना

  5. भूमि उपयोग की योजना को सरल बनाना और E-Governance को बढ़ावा देना

 पृष्ठभूमि: क्यों जरूरी है यह सुधार?

भारत के अधिकांश शहरों में भूमि रिकॉर्ड

दशकों से कागज़ों में दर्ज हैं जो अब अप्रासंगिक, विवादास्पद और कई बार भ्रष्टाचार से ग्रस्त हो चुके हैं। इसी के चलते निम्न समस्याएं पैदा हो रही थीं:

  • मालिकाना हक में अस्पष्टता

  • अदालतों में वर्षों से लंबित भूमि विवाद

  • सरकारी योजनाओं में देरी

  • अवैध कब्जे और अतिक्रमण

भूमि सुधार परियोजना का उद्देश्य इन समस्याओं का स्थायी समाधान निकालना है।

 पायलट प्रोजेक्ट में क्या हो रहा है?

देश के कई शहरों जैसे की लखनऊ, इंदौर, भुवनेश्वर, सूरत और नागपुर में यह परियोजना प्रारंभिक चरणों में पायलट मॉडल के रूप में लागू की जा रही है। इस परियोजना में निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान दिया जा रहा है:

  • सैटेलाइट इमेजिंग और GIS मैपिंग द्वारा भूमि का सटीक सर्वेक्षण

  • डिजिटल प्रॉपर्टी कार्ड की तैयारी

  • संपत्ति स्वामित्व प्रमाण पत्र का वितरण

  • सार्वजनिक पोर्टल के माध्यम से नागरिकों को उनके अधिकार की जानकारी उपलब्ध कराना

  • रियल टाइम रिकॉर्ड अपडेटिंग सिस्टम

 केंद्र सरकार की भूमिका

केंद्र सरकार इस परियोजना की मॉनिटरिंग National Urban Digital Mission (NUDM) के तहत कर रही है और राज्यों को तकनीकी सहायता, बजट और विशेषज्ञ टीमों के माध्यम से सहयोग दे रही है।

सरकार ने साफ कहा है कि 2024 दिसंबर तक यह कार्य हर हाल में पूरा होना चाहिए ताकि 2025 में राष्ट्रीय स्तर पर इसे लागू किया जा सके।

 नागरिकों को क्या लाभ होंगे?

  1. प्रॉपर्टी विवाद कम होंगे

  2. बैंक से ऋण लेने में आसानी होगी

  3. उचित कर निर्धारण होगा

  4. रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी

  5. स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में तेज़ी आएगी

 राज्यों की जिम्मेदारियाँ

राज्यों को निम्नलिखित कार्य निर्धारित समय में पूरा करने हैं:

  • सर्वेक्षण एजेंसियों की नियुक्ति

  • भूमि डेटा का संकलन

  • डिजिटल पोर्टल की स्थापना

  • नागरिकों के बीच जागरूकता अभियान

  • अंतिम रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपना

 चुनौतियाँ क्या हैं?

  1. पुराने और विवादित रिकॉर्ड की सफाई

  2. स्थानीय राजनीति और प्रशासनिक रुकावटें

  3. तकनीकी संसाधनों की कमी

  4. नागरिकों का सहयोग प्राप्त करना

हालांकि केंद्र सरकार ने इसके लिए अतिरिक्त फंडिंग, तकनीकी स्टाफ और ट्रेनिंग प्रोग्राम्स की व्यवस्था की है।

 

 

 

 

 

 

 

 

Awaz Mazha
Author: Awaz Mazha

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