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ED की रडार पर डीके शिवकुमार के भाई सुरेश कुमार

ईडी का शिकंजा अब डीके सुरेश पर: कांग्रेस नेता को भेजा समन, मनी लॉन्ड्रिंग की जांच में बड़ा मोड़

कर्नाटक की सियासत एक बा

र फिर गर्मा गई है। प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate – ED) ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डीके शिवकुमार के भाई और बेंगलुरु ग्रामीण से सांसद डीके सुरेश को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में समन जारी किया है। ईडी की इस कार्रवाई ने राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है, खासकर जब यह मामला आगामी चुनावों और विपक्षी एकजुटता की तैयारियों के बीच आया है।

बताया जा रहा है

कि डीके सुरेश को यह समन भूमि सौदे में गड़बड़ी और कथित मनी ट्रेल से संबंधित मामले में भेजा गया है। इससे पहले भी डीके शिवकुमार खुद ईडी की जांच के घेरे में रह चुके हैं और कुछ समय हिरासत में भी रहे थे।

क्या है पूरा मामला?

ईडी ने जिन दस्तावेजों और ट्रांजैक्शनों की जांच की है, उनके अनुसार यह मामला एक पुराने भूमि सौदे से जुड़ा है, जिसमें कथित रूप से बड़ी रकम कैश में दी गई थी और उसका कोई वैध दस्तावेजी रिकॉर्ड नहीं है। इसी ट्रांजैक्शन की तह में जाने के लिए ईडी ने डीके सुरेश को पूछताछ के लिए बुलाया है।

सूत्रों के मुताबिक, एजेंसी के पास ऐसे साक्ष्य हैं जिनमें बड़े पैमाने पर फंड ट्रांसफर, अघोषित आय, और बेनामी संपत्तियों का संदिग्ध लेनदेन शामिल है। इन सभी बिंदुओं पर डीके सुरेश से सफाई मांगी जाएगी।

क्या बोले कांग्रेस नेता?

कांग्रेस पार्टी ने इस समन को स्पष्ट रूप से “राजनीतिक प्रतिशोध” बताया है। पार्टी के प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा शासित केंद्र सरकार लगातार विपक्षी नेताओं को निशाना बना रही है, ताकि चुनावी मौसम में उन्हें राजनीतिक रूप से कमजोर किया जा सके।

डीके शिवकुमार, जो वर्तमान में कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री हैं, उन्होंने भी इस कार्रवाई की निंदा की है और कहा:

“भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई की आड़ में ईडी को राजनीतिक टूल बनाया जा रहा है। हमारे परिवार को लगातार टारगेट किया जा रहा है क्योंकि हम भाजपा के सामने झुकते नहीं।”

यह पहली बार नहीं…

डीके परिवार लंबे समय से ईडी की नजरों में रहा है। 2017 में डीके शिवकुमार पर आयकर विभाग की रेड पड़ी थी जिसमें करोड़ों की नकदी बरामद हुई थी। इसके बाद से लगातार:

  • आयकर विभाग,

  • प्रवर्तन निदेशालय (ED), और

  • सीबीआई जैसी एजेंसियों द्वारा जांच की जा रही है।

डीके सुरेश हालांकि अब तक सीधे किसी केस में

नामजद नहीं थे, लेकिन अब ईडी की नजरें उन पर भी पड़ गई हैं।

कानूनी विशेषज्ञों की राय

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि समन भेजने का अर्थ यह नहीं कि आरोपी ठहराया गया है। यह प्राथमिक पूछताछ का हिस्सा है जिसमें संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने और दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है।

यदि डीके सुरेश संतोषजनक उत्तर देने में विफल रहते हैं, तो ईडी उन्हें आरोपी के तौर पर भी नामजद कर सकती है। ऐसे में आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।

राजनीतिक प्रभाव

इस कार्रवाई के कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं:

  • एक तरफ यह कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को चुनावी रणनीति में बाधा डाल सकता है।

  • दूसरी ओर, भाजपा इस मामले को भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता के रूप में प्रचारित कर सकती है।

  • क्षेत्रीय स्तर पर इसका असर बेंगलुरु ग्रामीण और आसपास की सीटों पर दिखाई दे सकता है।

जनता का नजरिया

जहां एक वर्ग इसे सत्ता का दुरुपयोग मानता है, वहीं कुछ लोग मानते हैं कि जांच एजेंसियों को अपना काम निष्पक्षता से करने देना चाहिए, चाहे वो किसी भी पार्टी का नेता क्यों न हो।

जनता यह भी चाहती है कि मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर मामलों में तेजी से निष्पक्ष जांच हो, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

 

 

 

 

 

 

 

Awaz Mazha
Author: Awaz Mazha

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